प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में जल्द ही बड़े स्तर पर कैबिनेट फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक यह बदलाव संसद के मानसून सत्र से पहले या जुलाई के दौरान कभी भी किया जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार, संभावित फेरबदल को पार्टी संगठन में भी बड़े बदलावों के साथ जोड़ा जा रहा है, जहां नए अध्यक्ष Nitin Naveen की टीम की घोषणा के साथ मंत्रिपरिषद में भी नए चेहरों को जगह मिल सकती है। बताया जा रहा है कि संगठन और सरकार के बीच “संतुलन” बनाने के लिए कई अहम फैसले लगभग अंतिम चरण में हैं।
संगठन और सरकार में तालमेल की रणनीति
सूत्रों का कहना है कि कुछ केंद्रीय राज्य मंत्रियों को पार्टी संगठन में जिम्मेदारी दी जा सकती है, जबकि संगठन से जुड़े कुछ युवा चेहरों को मोदी कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। इसके साथ ही कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव की भी संभावना जताई जा रही है।
शिक्षा मंत्रालय को लेकर चर्चा
केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। NEET पेपर लीक और CBSE की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली से जुड़े विवादों के बाद उनके मंत्रालय को लेकर सवाल उठे हैं, हालांकि सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।
“वन पर्सन, वन पोस्ट” नीति का असर
सूत्रों के मुताबिक बीजेपी अपने “एक व्यक्ति, एक पद” सिद्धांत को लागू कर सकती है। इसके तहत Pankaj Chaudhary और Harsh Malhotra जैसे नेताओं को संगठन में नई जिम्मेदारी दी जा सकती है, जिससे मंत्रिपरिषद में फेरबदल की संभावना और बढ़ गई है।
राज्यों और जातीय संतुलन पर फोकस
पार्टी रणनीति के तहत उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड समेत कई राज्यों के प्रतिनिधित्व को कैबिनेट में बढ़ाने पर भी विचार हो रहा है। साथ ही क्षेत्रीय और जातीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है।
विपक्षी दलों से आए नेताओं को भी मौका संभव
सूत्रों का यह भी कहना है कि तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव गुट) और आम आदमी पार्टी छोड़कर आए कुछ सांसदों को भी मंत्री पद मिल सकता है। इनमें से कुछ नामों पर अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री स्तर पर लिया जाएगा।
कुछ मौजूदा मंत्रियों की भूमिका बदलने की संभावना
Ravneet Singh Bittu को पंजाब की राजनीति पर फोकस करने के लिए संगठनात्मक भूमिका में भेजे जाने की चर्चा है। वहीं Hardeep Singh Puri और B. L. Verma के भविष्य को लेकर भी स्थिति नवंबर के बाद स्पष्ट हो सकती है।
इसके अलावा George Kurian जैसे नेताओं का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी नई भूमिका तय की जा सकती है।
राज्यपाल पदों पर भी बदलाव की संभावना
सूत्रों के अनुसार, कर्नाटक के थावरचंद गहलोत, मध्य प्रदेश के मंगुभाई पटेल और उत्तराखंड के गुरमीत सिंह के कार्यकाल पूरे होने के बाद कुछ मंत्रियों को राज्यपाल जैसे संवैधानिक पदों पर भेजे जाने की भी संभावना जताई जा रही है।
प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं के बीच फैसले की संभावना
प्रधानमंत्री मोदी की आगामी विदेश यात्राओं और संसद सत्र के शेड्यूल को देखते हुए माना जा रहा है कि कैबिनेट विस्तार का समय रणनीतिक रूप से तय किया जाएगा।
हालांकि, आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और सरकार से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अंतिम निर्णय पूरी तरह प्रधानमंत्री के विवेक पर निर्भर करेगा।










