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अरावली विवाद में नया मोड़, सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही फैसले पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अरावली पर्वतमाला लगातार चर्चा में है। पिछले हफ्ते अरावली पर सुनावई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के फैसले की पूरे देश में आलोचना हो रही थी। वहीं, आज सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ही दिशानिर्देशों को स्थगित करने का आदेश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा, “हम समिति की सिफारिशों और 20 नवंबर 2025 को दिए गए इस न्यायालय के निर्देशों को स्थगित रखना आवश्यक समझते हैं। नई समिति के गठन तक यह स्थगन प्रभावी रहेगा।”

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन करने का आदेश दिया है। यह समिति कई चरणों में जांच करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला की नई परिभाषा दी थी, जिसपर अध्ययन करने के लिए कोर्ट ने एक नई कमेटी का गठन करने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार समेत दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात की राज्य सरकारों को भी नोटिस जारी किया है। अदालत ने विशेषज्ञ समितियों के निष्कर्ष पर भी स्पष्टीकरण देने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट 21 जनवरी 2026 को मामले पर अगली सुनवाई करेगा।

क्या है अरावली विवाद?
गुजरात के गिर से शुरू होकर राजस्थान, हरियाणा से होते हुए दिल्ली की रायसीना हिल्स तक फैली अरावली पर्वत श्रृंखला 670 किलोमीटर लंबी है। 20 नवंबर को अरावली में चल रहे अवैध खनन पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसकी परिभाषा बनाई थी। सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार, “सतत खनन के लिए प्रबंधन योजना (MPSM) बनने तक खनन के लिए कोई भी नया पट्टा जारी नहीं किया जाएगा।”

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, थार रेगिस्तान के लिए अरावली एक दीवार का काम करती है, जिसके कारण अरावली के दूसरी तरफ हरियाली देखने को मिलती है। वहीं, अरावली में कई जीव-जंतु रहते हैं। अवैध खनन के कारण अरावली की घटती ऊंचाई जलवायु परिवर्तन का कारण बन सकते हैं।

खनन पर लगी रोक
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सोशल मीडिया पर मुहिम छिड़ गई। कई पर्यावरण विशेषज्ञों ने इसपर आपत्ति जताई, जिसके बाद केंद्र सरकार ने भी अरावली में खनन पर पूरी तरह से रोक लगा दी। वहीं, अब सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले पर रोक लगाते हुए फिर से जांच के आदेश दिए हैं।

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