जशपुर (छत्तीसगढ़)। जिले के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस और आम लोगों दोनों को चौंका दिया। 30 वर्षीय सीमित खाखा को पुलिस ने मरा हुआ घोषित कर मर्डर केस बंद कर दिया था। लेकिन शनिवार की रात वह जिंदा अपने गांव पहुंचकर सीधे पुलिस स्टेशन पहुंचा और कहा कि मैं जिंदा हूँ, मेरी हत्या नहीं हुई। युवक के जिंदा मिलने से पुलिस की जांच और केस की दिशा पूरी तरह बदल गई है।
कैसे हुआ मामला सामने
जानकारी के मुताबिक सीमित खाखा ग्राम पंचायत सिटोंगा का निवासी है। वह रोजगार की तलाश में झारखंड गया था। शनिवार रात वह रांची से लौटते हुए बस से जशपुर आया और सिटोंगा जाने के लिए ऑटो में बैठा। ऑटो चालक ने सीमित को पहचान लिया और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद सीमित को सीधे सिटी कोतवाली थाना लाया गया।
सीमित ने पुलिस को बताया कि झारखंड में मजदूरी करता रहा और मोबाइल न होने के कारण अपने परिजनों या गांव वालों से संपर्क नहीं कर सका। वह क्रिसमस मनाने घर लौट रहा था, तभी पुलिस और आम लोगों के बीच यह मामला उजागर हुआ।
पुराना मर्डर केस और अधजली लाश
22 अक्टूबर 2025 को सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के तुरीटोंगरी जंगल में एक अधजली लाश मिली थी। शव का चेहरा और अधिकांश शरीर जल चुका था। पुलिस ने घटनास्थल का पंचनामा बनाया और पोस्टमॉर्टम करवाया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मृत्यु को हत्या माना गया। इसके बाद धारा 103(1) और 238(क) के तहत केस दर्ज किया गया।
शव की पहचान कार्यपालिक मजिस्ट्रेट (नायब तहसीलदार) के समक्ष सीमित खाखा के परिवार वालों ने की थी। मृतक के तीन दोस्तों रामजीत राम, वीरेंद्र राम और एक नाबालिग को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया था। आरोपियों ने कमीशन राशि को लेकर शराब पीते समय हुई मारपीट और हत्या को कबूल किया।
जिंदा निकलने के बाद पुलिस के लिए नई चुनौतियां
सीमित के जिंदा होने के बाद पुलिस के लिए सवाल खड़े हो गए हैं कि आखिर अधजली लाश किसकी थी और क्यों आरोपियों ने हत्या कबूल की। एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया कि वास्तविक मृतक की पहचान के लिए राजपत्रित अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच टीम गठित की गई है। वहीं गिरफ्तार आरोपियों की रिहाई के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
हत्या की कहानी
पुलिस के अनुसार, 17 अक्टूबर को सीमित खाखा अपने दोस्तों रामजीत राम, वीरेंद्र राम और नाबालिग के साथ जशपुर लौटा था। बांकी नदी पुलिया के पास शराब पीते समय कमीशन राशि को लेकर विवाद हुआ। इसी दौरान रामजीत राम ने सीमित के सीने में चाकू से हमला किया, जबकि विरेंद्र राम ने लोहे की रॉड से हमला किया। आरोपियों ने शव को करीब 400 मीटर दूर जंगल में फेंक कर पेट्रोल डालकर जलाने की कोशिश की।
इसके बाद गिरफ्तार आरोपियों में शीतल मिंज (39) और जीतू राम (32) को भी गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के खिलाफ धारा 103(1), 238(क), 61(2), 127(1), 309(4), 298, 351(2) और 3(5) के तहत केस दर्ज किया गया।
अब आगे की कार्रवाई
सीमित खाखा के जिंदा होने के बाद पुलिस ने केस की पुनः जांच शुरू कर दी है। वास्तविक मृतक की पहचान और पुराने मामलों की सच्चाई सामने आने तक सभी आरोपी न्यायिक प्रक्रिया में हैं। पुलिस ने बताया कि पूरी तरह से साक्ष्यों और फोरेंसिक जांच के आधार पर ही आगे की कार्रवाई होगी।
यह मामला छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है और साथ ही आम लोगों के लिए भी चौंकाने वाला घटना है, क्योंकि पुलिस ने एक व्यक्ति को मृत घोषित कर मर्डर केस बंद कर दिया था।










