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इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में परीक्षा से पहले पेपर लीक! BSc सेकंड ईयर का एंटोमोलॉजी प्रश्नपत्र WhatsApp पर वायरल

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में परीक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विश्वविद्यालय में BSc सेकंड ईयर के एंटोमोलॉजी (कीट विज्ञान) विषय का प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से पहले ही कथित तौर पर लीक होकर WhatsApp पर वायरल होने की जानकारी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि 20 अगस्त को होने वाली परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र छात्रों के बीच पहुंच गया। परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र वायरल होने की खबर सामने आते ही विद्यार्थियों के बीच हड़कंप मच गया और विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे।

परीक्षा से पहले WhatsApp पर पहुंचा प्रश्नपत्र
मिली जानकारी के मुताबिक, BSc सेकंड ईयर के एंटोमोलॉजी विषय की परीक्षा 20 अगस्त को आयोजित की जानी थी। लेकिन परीक्षा शुरू होने से पहले ही इस विषय का प्रश्नपत्र WhatsApp के जरिए छात्रों के बीच प्रसारित होने लगा।

प्रश्नपत्र वायरल होने की जानकारी सामने आने के बाद छात्रों में नाराजगी बढ़ गई। विद्यार्थियों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और यदि पेपर लीक की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

परीक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र छात्रों तक कैसे पहुंचा, यह इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है। अगर वायरल हुआ प्रश्नपत्र वास्तविक परीक्षा का ही प्रश्नपत्र है, तो इसकी गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

अब यह भी जांच का विषय है कि प्रश्नपत्र विश्वविद्यालय की किस स्तर की व्यवस्था से बाहर आया और इसे छात्रों तक पहुंचाने में किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

क्या विश्वविद्यालय से जुड़ा कोई व्यक्ति शामिल?
पेपर के कथित लीक होने के बाद विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। छात्रों के बीच यह चर्चा भी है कि अगर प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही वायरल हुआ, तो इसकी जानकारी सबसे पहले किसे थी और प्रश्नपत्र तक पहुंच किन लोगों की थी।

हालांकि, फिलहाल किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पूरे मामले में जांच के निष्कर्ष का इंतजार करना जरूरी है।

छात्रों ने की जांच और कार्रवाई की मांग
प्रश्नपत्र वायरल होने की खबर के बाद छात्रों ने मामले की जांच कराने की मांग की है। विद्यार्थियों का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखना जरूरी है और यदि पेपर वास्तव में परीक्षा से पहले लीक हुआ है तो दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि वायरल प्रश्नपत्र असली है या नहीं और यदि असली है तो वह परीक्षा से पहले छात्रों तक कैसे पहुंचा।

जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर
फिलहाल मामले की पूरी सच्चाई विश्वविद्यालय प्रशासन की जांच के बाद ही सामने आएगी। जांच में यह स्पष्ट होगा कि WhatsApp पर वायरल हुआ प्रश्नपत्र वास्तविक था या नहीं, प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले बाहर कैसे आया और इसमें किसी कर्मचारी, अधिकारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

अगर पेपर लीक की पुष्टि होती है, तो परीक्षा की प्रक्रिया और छात्रों के हित में विश्वविद्यालय को आगे क्या कदम उठाने चाहिए, यह भी महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल पेपर लीक की खबर ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब सभी की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन की जांच और उसके आधिकारिक निष्कर्ष पर है।

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