रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पास ग्राम नकटी में गरीबों के 85 मकान तोड़े जाने का मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ है कि अब एक और नया विवाद खड़ा हो गया है। नवा रायपुर क्षेत्र के ग्राम तूता में रहने वाले 36 परिवारों को उनके कब्जे की जमीन पर बने मकानों को तोड़ने का नोटिस जारी कर दिया गया है। इस नोटिस के बाद से ग्रामीणों में बेघर होने का डर और भारी आक्रोश व्याप्त है।
नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRDA) ने अपनी भूमि पर कथित अतिक्रमण के खिलाफ यह बड़ी कार्रवाई शुरू की है। प्राधिकरण द्वारा 30 जून 2026 को जारी इस नोटिस का जवाब प्रभावितों को 6 जुलाई 2026 तक देने का निर्देश दिया गया है।
हैरान करने वाली बात यह है कि ग्रामीणों के अनुसार, जिन 36 परिवारों को यह नोटिस थमाया गया है, उनमें से 20 परिवारों के मकान ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ (PMAY) के तहत सरकारी मदद से ही बनाए गए हैं। अब ऐसे में सरकारी योजना के तहत बने मकानों को ही अवैध बताकर तोड़ने के नोटिस पर सवाल उठने लगे हैं।
प्राधिकरण ने अभनपुर तहसील के ग्राम तूता (पटवारी हल्का क्रमांक-15, राजस्व निरीक्षक मंडल-केंद्री) स्थित खसरा नंबर 645 की भूमि पर पक्के निर्माण को अतिक्रमण माना है।
- गयाराम का मामला: उदाहरण के तौर पर, ग्राम तूता निवासी गयाराम (पिता नथ्थू राम) को जारी नोटिस में कहा गया है कि उन्होंने प्राधिकरण की स्वामित्व वाली भूमि पर बिना अनुमति के लगभग 700 वर्गफीट (28×25 फीट) क्षेत्र में पक्का मकान बनाया है।
- तहसीलदार की शक्तियां: छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 के प्रावधानों के तहत यह कार्रवाई की जा रही है। राज्य शासन की अधिसूचना के मुताबिक, नवा रायपुर विकास प्राधिकरण के सहायक प्रबंधक (भूमि) को तहसीलदार की शक्तियां प्राप्त हैं, जिनके तहत यह कारण बताओ नोटिस जारी हुआ है।
एकपक्षीय कार्रवाई की चेतावनी: प्राधिकरण ने साफ किया है कि सभी संबंधित व्यक्ति 6 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजे कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखें। यदि तय समय पर जवाब नहीं दिया गया, तो रिकॉर्ड के आधार पर एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए मकानों को ढहा दिया जाएगा।
गौरतलब है कि हाल ही में रायपुर के पास ग्राम नकटी में 85 लोगों के मकानों पर बुलडोजर चलाया गया है, जिन पर शामिलात चरागाह की जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप था। इस कार्रवाई के बाद से ही प्रदेश की सियासत जबरदस्त तरीके से गरमाई हुई है।
नकटी के बेघर हुए पीड़ितों ने राजधानी रायपुर में कलेक्टर दफ्तर के सामने उग्र प्रदर्शन किया है और बीते गुरुवार को ही आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी के निवास का घेराव कर अपना विरोध दर्ज कराया है। अब तूता गांव में 36 और परिवारों को मिले इस नोटिस ने आग में घी डालने का काम किया है, जिससे प्रशासन और सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।










