नगरी। सिहावा क्षेत्र के ग्राम उमरगांव में मंगलवार की सुबह एक ऐसा मानवीय दृश्य देखने को मिला, जिसने यह साबित कर दिया कि करुणा और संवेदना आज भी समाज की जड़ों में जीवित है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व से भटककर आया एक घायल कोटरी हिरण स्कूल मैदान की तार की जाली में फँस गया था। दर्द और भय से तड़पते हिरण को देखकर गांव के बच्चों और युवाओं ने साहस और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए उसे सुरक्षित बाहर निकाला।
क्रिकेट खेलते समय दिखा घायल हिरण
प्रतिदिन की तरह बच्चे स्कूल मैदान में क्रिकेट खेल रहे थे, तभी उनकी नजर जाली में फँसे हिरण पर पड़ी। उसका मुँह घायल था और वह बुरी तरह सहमा हुआ था। आमतौर पर ऐसी स्थिति में लोग दूरी बना लेते हैं, लेकिन उमरगांव के बच्चों और युवकों ने बिना समय गंवाए जोखिम उठाया और सावधानीपूर्वक हिरण को तार से मुक्त किया। इसके बाद उसे माध्यमिक शाला भवन में सुरक्षित रखा गया, ताकि और चोट न लगे।
वन विभाग की टीम ने किया रेस्क्यू
घटना की जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता महेश अग्रवाल ने तत्काल वन परिक्षेत्र बिरगुड़ी और मीडिया को दी। सूचना मिलते ही उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, गरियाबंद के उपनिदेशक वरुण जैन के निर्देश पर सहायक संचालक राजपूत, वन रक्षक अमित पटेल, अनिल कश्यप सहित रेस्क्यू टीम मौके पर पहुँची। टीम ने हिरण को सुरक्षित पकड़कर वाहन के माध्यम से इलाज के लिए रवाना किया।
समाज के लिए प्रेरणादायक पहल
वन्यजीवों के शिकार और क्रूरता की खबरों के बीच उमरगांव के बच्चों की यह पहल मानवता और सह-अस्तित्व का सशक्त संदेश देती है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रकृति और मानव का रिश्ता केवल विचार नहीं, बल्कि करुणा से निभाया जाने वाला दायित्व है।
स्कूल मैदान बना जीवन का पाठशाला
यह घटना दर्शाती है कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होती। कभी-कभी एक स्कूल मैदान ही वह जगह बन जाता है, जहाँ बच्चे मानवता, संवेदना और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का सबसे महत्वपूर्ण पाठ सीखते हैं और पूरे समाज को सिखा देते हैं।








