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कान्हा में खतरनाक वायरस का कहर, 2 महीने में 7 बाघों की मौत

Kanha Tiger Reserve: मध्य प्रदेश के मंडला जिले में स्थित कान्हा टाइगर रिजर्व में केनाइन डिस्टेम्पर वायरस (CDV) का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. इस घातक वायरस की चपेट में आने से एक और बाघ की मौत हो गई है. मुक्की क्वॉरेंटाइन सेंटर में उपचार के दौरान बाघ ने दम तोड़ दिया. इसके साथ ही पिछले करीब दो महीनों में CDV संक्रमण के कारण जान गंवाने वाले बाघों की संख्या बढ़कर सात हो गई है.

वन विभाग के अनुसार, 4 जून 2026 को कान्हा टाइगर रिजर्व के किसली परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक 777 स्थित संदूक खोल क्षेत्र में एक बाघ बेहद कमजोर और बीमार हालत में मिला था. हाथी गश्ती दल की सूचना के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बाघ को रेस्क्यू कर मुक्की स्थित क्वॉरेंटाइन सेंटर में भर्ती कराया गया.

बाघ में केनाइन डिस्टेम्पर वायरस के लक्षण पाए गए थे
शुरुआती जांच में बाघ में केनाइन डिस्टेम्पर वायरस के लक्षण पाए गए थे. इसके बाद वन विभाग ने विशेषज्ञों की निगरानी में उसका इलाज शुरू कराया. बाघ के उपचार में कान्हा टाइगर रिजर्व की टीम के साथ नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा एवं विज्ञान विश्वविद्यालय और वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट (WCT) के विशेषज्ञ भी शामिल थे. लगातार इलाज और स्वास्थ्य निगरानी के बावजूद बाघ की हालत में सुधार नहीं हो सका और मंगलवार को उसकी मौत हो गई.

कान्हा टाइगर रिजर्व में CDV संक्रमण का पहला बड़ा असर सरही परिक्षेत्र में देखने को मिला था. अमाही क्षेत्र में बाघिन टी-141 के चार शावकों में से एक का शव 21 अप्रैल को मिला था. इसके बाद 24 और 25 अप्रैल को दो अन्य शावकों की भी मौत हो गई. लगातार हो रही मौतों के बाद वन विभाग ने बाघिन और उसके बचे हुए एकमात्र शावक को रेस्क्यू कर मुक्की क्वॉरेंटाइन सेंटर में शिफ्ट किया था.

29 अप्रैल को बाघिन ने दम तोड़ा
संक्रमण का असर इतना गंभीर था कि 29 अप्रैल को पहले बाघिन ने दम तोड़ दिया और इसके बाद उसके जीवित शावक की भी मौत हो गई. इस तरह महज नौ दिनों के अंदर एक बाघिन और उसके चारों शावकों की जान चली गई.

इसके बाद 19 मई को मुक्की परिक्षेत्र के चर्चित महावीर बाघ की भी मौत हुई थी. जांच में उसकी मौत का कारण भी केनाइन डिस्टेम्पर वायरस को बताया गया. अब एक और बाघ की मौत के बाद कान्हा में CDV संक्रमण से मरने वाले बाघों का आंकड़ा सात तक पहुंच गया है.

लगातार हो रही बाघों की मौत ने वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि CDV वायरस वन्यजीवों के लिए बेहद खतरनाक है और इसके फैलाव को रोकने के लिए लगातार निगरानी, संक्रमित वन्यजीवों की पहचान और समय पर इलाज बेहद जरूरी है.

फिलहाल कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन संक्रमण की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित क्षेत्रों में विशेष निगरानी अभियान चलाया जा रहा है. बाघों की लगातार मौत ने देश के प्रमुख टाइगर रिजर्व में शामिल कान्हा की वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

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