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पति सरकारी डॉक्टर है, लेकिन इलाज पत्नी करती है; गजब है कहानी

Bagalkot Karnataka Health News: कर्नाटक के बागलकोट जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. आरोप है कि यहां एक सरकारी अस्पताल में में तैनात डॉक्टर की जगह उनकी पत्नी मरीजों का इलाज कर रही थी और दवाइयां बांट रही थी.

कलादगी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पद पर एच. वी. लेबागिरी कार्यरत हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनकी पत्नी अस्पताल में किसी आधिकारिक पद पर नहीं होने के बावजूद डॉक्टर की तरह मरीजों की जांच कर रही हैं और उन्हें दवाएं दे रही हैं.

स्थानीय लोगों ने लगाए गंभीर आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि डॉक्टर लेबागिरी की पत्नी अक्सर उनके साथ अस्पताल आती हैं और डॉक्टर की कुर्सी पर बैठकर मरीजों की जांच करती हैं. आरोप है कि वह सामान्य मरीजों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं का भी इलाज करती हैं. लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि बिना किसी आधिकारिक जिम्मेदारी या मेडिकल अनुमति के किसी व्यक्ति द्वारा इलाज किया जा रहा है और मरीजों की सेहत पर इसका गलत असर पड़ता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा.

इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने अस्पताल पहुंचकर डॉक्टर एच. वी. लेबागिरी से जवाब भी मांगा. बताया जा रहा है कि इस दौरान लोगों और डॉक्टर के बीच बहस भी हुई. लोगों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और इस मामले में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.ॉ

डॉक्टर ने दी सफाई
वहीं, डॉक्टर लेबागिरी ने सफाई देते हुए कहा कि मरीजों को दी गई पर्ची पर लिखावट उनकी पत्नी की नहीं है. उन्होंने आरोपों को खारिज करने की कोशिश की. इसी दौरान उनकी पत्नी मोबाइल पर बात करने का बहाना बनाकर अस्पताल से बाहर चली गईं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में लोग भरोसे के साथ इलाज कराने आते हैं. ऐसे में यदि डॉक्टर की अनुपस्थिति में कोई अन्य व्यक्ति मरीजों का इलाज करता है तो यह गंभीर लापरवाही है. उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से मामले की जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है.

फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. हालांकि आरोपों के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा और बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को जल्द से जल्द जांच करनी चाहिए.

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