रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के निगमों, मंडलों, आयोगों और स्वायत्तशासी संस्थाओं में नियुक्तियों को लेकर एक बेहद सख्त कदम उठाया है। शासन ने साफ कर दिया है कि जिन संस्थानों के पास अपने औपचारिक ‘भर्ती नियम’ (Recruitment Rules) नहीं हैं, वे अब नई भर्तियां नहीं कर सकेंगे। सरकार ने ऐसी सभी संस्थाओं में भर्ती प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
सरकार के संज्ञान में आया था कि कई प्रमुख संस्थानों में बिना किसी पारदर्शी नियम के ही अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्तियां की जा रही थीं। इन अनियमितताओं को रोकने और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए यह कड़ा रुख अपनाया गया है।
सिविल सेवा नियम होंगे लागू
अब इन संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों की मनमानी नहीं चलेगी। सरकार ने आदेश दिया है कि इन पर भी शासकीय कर्मचारियों की तरह निम्नलिखित नियम प्रभावी होंगे:
- छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965
- वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील नियम, 1966
किन पर गाज गिरेगी? (दायरे में आने वाले संस्थान)
यह आदेश उन सभी संस्थानों पर लागू होगा जहाँ राज्य सरकार की हिस्सेदारी 51% या उससे अधिक है:
- स्थानीय या कानूनी प्राधिकरण और विश्वविद्यालय।
- सरकारी सहायता प्राप्त (Grants-in-aid) संस्थाएं।
- निगम और सहकारी सोसायटियां।
- कार्यभारित या आकस्मिकता निधि से भुगतान पाने वाले कार्यालय। ध्यान दें: संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत आने वाले अल्पसंख्यक संस्थानों को इस दायरे से बाहर रखा गया है।
विभागों को अल्टीमेटम: खुद बनाने होंगे ‘आदर्श नियम’
सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने अब जिम्मेदारी सीधे प्रशासकीय विभागों के कंधों पर डाल दी है। अब नियमों की व्याख्या के लिए GAD के चक्कर नहीं काटने होंगे, प्रशासकीय विभाग स्वयं इसके लिए सक्षम होंगे। यदि निर्धारित समय में ‘आदर्श भर्ती नियम’ तैयार नहीं होते, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी। तैयार नियमों की एक कॉपी सामान्य प्रशासन विभाग को भेजना अनिवार्य होगा।
आरक्षण के नियमों में कोई ढिलाई नहीं
सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संस्थानों द्वारा बनाए जाने वाले नए भर्ती नियमों में आरक्षण संबंधी प्रावधान बिल्कुल वैसे ही रहेंगे, जैसे राज्य शासन के अन्य पदों पर लागू हैं। इसमें किसी भी तरह का बदलाव या उल्लंघन स्वीकार्य नहीं होगा।










