पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सहयोगी चंद्रनाथ रथ की हत्या मामले में CBI ने कोलकाता की स्पेशल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दिया है. मामले में 11 आरोपी हैं, जिसमें से 2 बीजेपी के कार्यकर्ता हैं. सीबीआई ने हाल ही में रथ के कार्यालय में काम करने वाले बीजेपी कार्यकर्ता सागर सोनकर और उसके भाई साहिब सोनकर को गिरफ्तार किया था. उन पर रथ की हत्या की सुपारी उत्तर प्रदेश के शूटर्स को देने का आरोप है.
अधिकारियों ने कहा कि राज्य में एक अन्य राजनीतिक दल के पदाधिकारी की भूमिका भी जांच के दायरे में है. उन्होंने बताया कि सीबीआई को जानकारी मिली है कि बीजेपी में शामिल होने से पहले 2020 तक सागर प्रतिद्वंद्वी पार्टी के विधायक के साथ काम करता था. सीबीआई के मुताबिक जांच में सामने आया कि भवानीपुर सीट पर शुभेंदु अधिकारी के चुनाव प्रचार अभियान में अहम भूमिका निभाने वाले रथ की हत्या की योजना दिसंबर 2025 से ही बन रही थी, लेकिन किसी न किसी वजह से इस सुपारी हत्या को अंजाम देने की तारीख बार-बार बदलती रही.
अब तक 6 शूटर हो चुके हैं अरेस्ट
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के दो दिन बाद छह मई को मध्यग्राम में रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने अब तक छह शूटरों मोनू सिंह, राज सिंह, गोलू सिंह, मयंक राज मिश्रा, विक्की मौर्य और नवीन कुमार सिंह के अलावा सुपारी लेने वाले बिचौलियों विनय राय, संजय राय और विकास मिश्रा को गिरफ्तार किया है. उन्होंने बताया कि एक आरोपी अब भी फरार है. पश्चिम बंगाल सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने राज्य पुलिस से रथ की हत्या मामले की जांच अपने हाथ में ली.
चंद्रनाथ रथ के बारे में जानिए
चंद्रनाथ रथ पहले वायुसेना में थे. वायुसेना से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट जगत में काम करना शुरू किया. धीरे-धीरे उन्होंने राजनीतिक समन्वयक और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं. 2019 में शुभेंदु अधिकारी ममता बनर्जी की सरकार में मंत्री थे. उसी समय चंद्रनाथ रथ ने शुभेंदु के साथ काम करना शुरू किया.
अधिकारी की तरह चंद्रनाथ रथ का परिवार भी पहले तृणमूल कांग्रेस में था. उनकी मां हसी रथ टीएमसी के कार्यकाल में पूर्वी मेदिनीपुर से स्थानीय पंचायत समिति में पद पर थीं. बाद में शुभेंदु के टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने के बाद, चंद्रनाथ रथ का परिवार भी बीजेपी में शामिल हो गया.
चंद्रनाथ रथ लगभग दो दशकों तक अधिकारी के साथ रहे. इस दौरान उन्होंने संगठनात्मक कार्यों के साथ-साथ रसद प्रबंधन भी किया. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बनाए रखा. उन्होंने चुनाव प्रचार प्रबंधन और राजनीतिक समन्वय की जिम्मेदारियां संभालीं. बीजेपी के भवानीपुर चुनाव अभियान सहित कई हाई-वोल्टेज राजनीतिक मुकाबलों में वे अधिकारी की प्रमुख टीम का हिस्सा थे.










