बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में बेकाबू होते ध्वनि प्रदूषण और डीजे-धुमाल के शोर पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने शासन को फटकार लगाते हुए पूछा कि आखिर जनता को इस शोर से राहत कब मिलेगी?
एक साल से सिर्फ कागजों पर संशोधन
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पिछले एक साल से केवल ‘कानून में संशोधन’ की चर्चा हो रही है, लेकिन हकीकत में स्थिति जस की तस बनी हुई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब ठोस और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है, न कि केवल आश्वासनों की।
11 मई को रायपुर में ‘सुपर बैठक’
राज्य शासन की ओर से कोर्ट को जानकारी दी गई कि कोलाहल नियंत्रण अधिनियम को सख्त बनाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
- बैठक: 11 मई को रायपुर में।
- अध्यक्षता: अतिरिक्त मुख्य सचिव।
- एजेंडा: नए कड़े प्रावधानों को अंतिम रूप देना और विभागों के बीच समन्वय बनाना।
वर्तमान कानून को बताया ‘मजाक’
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि मौजूदा नियम इतने कमजोर हैं कि डीजे संचालकों के मन में कानून का कोई डर नहीं है।
“नियम तोड़ने पर मात्र 500 से 1000 रुपए का जुर्माना लगाकर खानापूर्ति की जाती है। न गाड़ियां जब्त होती हैं और न ही भारी जुर्माना लगता है। ऐसे में प्रदूषण कम होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है।”
जुलाई में होगी अगली सुनवाई
सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि प्रस्तावित संशोधनों में भारी जुर्माने और साउंड सिस्टम की जब्ती जैसे कड़े प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं। कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई में तय की है, जिसमें सरकार को संशोधनों की प्रगति रिपोर्ट पेश करनी होगी।









