Positive Thinking For Success: अगर कोई इंसान शिखर की सीढ़ियां चढ़कर मंजिल हासिल करता है तो उसकी मानसिकता, उपलब्धियां, मेहनत और समर्पण सबकुछ लगा होता है. इस तरह की सफलता तभी प्राप्त हो सकती है जब इन पर पूरा ध्यान दिया जाए. हालांकि, आज के समाज में, जब हम दूसरों की तरक्की, योग्यता, प्रसिद्धि और नाम देखते हैं, तो यह मानसिकता बढ़ती जा रही है कि हमें उन्हें परेशान करना चाहिए या उनका पतन कर देना चाहिए. ये कहना है प्रसिद्ध ज्योतिषी डॉ. बसवराज गुरुजी का.
गुरुजी ने कहा कि जब हम किसी दूसरे के धन, प्रसिद्धि या समृद्धि से ईर्ष्या या दुखी होते हैं, तो इसका हम पर निगेटिव प्रभाव पड़ता है. यह हमारा समय बर्बाद करता है, शरीर की पॉजिटिव एनर्जी को कम करता है और दिव्य शक्ति को घटाता है. जब हम किसी दूसरे के विनाश की कामना करते हैं, तो ये निगेटिव फीलिंग्स हमारे शरीर की 72 हजार नाड़ियों में जहर की तरह भर जाती हैं इसलिए हमें किसी की भी समृद्धि से ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि महाभारत में दुर्योधन का उदाहरण इसका सटीक उदाहरण है. अपार धन-दौलत और साम्राज्य होने के बावजूद दुर्योधन ने केवल पांचों पांडवों के बारे में निगेटिव सोच के कारण अपने पूरे साम्राज्य, वंश और परिवार को नष्ट कर दिया. यह ईर्ष्या के दुष्परिणामों का एक उत्कृष्ट उदाहरण है.










