छत्तीसगढ़ में गणेश चतुर्थी का पर्व मंगलवार को अत्यंत उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर प्रदेशभर के घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणपति बप्पा की प्रतिमाएं विराजमान हो चुकी हैं। इस वर्ष महंगाई का असर मूर्तियों की कीमतों पर भी साफ देखने को मिला है, जिससे मूर्तियों के दाम पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुने या 40 से 50 फीसदी तक बढ़ गए हैं।
बाजार की स्थिति और कारोबार के आंकड़े
- छोटे गणपति (घरेलू स्थापना): प्रदेशभर के लगभग 50 लाख घरों में छोटी प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। अकेले राजधानी रायपुर में करीब एक लाख छोटी प्रतिमाएं बिकती हैं। इनकी कीमतें आमतौर पर 500 से 7,000 रुपए (रायपुर में 400 से 8,000 रुपए) तक हैं। छोटे गणपति का यह पूरा कारोबार लगभग 500 करोड़ रुपए का है।
- बड़े गणपति (सार्वजनिक समितियां): प्रदेश में 20,000 से अधिक बड़े गणपति सार्वजनिक पंडालों में रखे जाते हैं। इनकी कीमतें 50 हजार से लेकर 5 लाख रुपए तक हैं। बड़े शहरों की प्रमुख समितियां एक से तीन लाख रुपए तक की प्रतिमाएं स्थापित कर रही हैं। इस सेगमेंट का कारोबार करीब 200 करोड़ रुपए का है।
- महंगाई का असर: आजाद चौक के व्यापारी किशोर साहू के अनुसार, पिछले साल जो मूर्तियां 200 से 300 रुपए में मिल जाती थीं, इस बार उनकी शुरुआती कीमत ही 400 रुपए से अधिक है। रंग और श्रृंगार सामग्री महंगी होने के कारण हर आकार की मूर्तियों के दाम बढ़े हैं।
50 साल बाद दुर्लभ संयोग: हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक साथ
इस वर्ष पंचांग के विशेष योग के चलते एक दुर्लभ संयोग बना है। 50 वर्षों में यह पहली बार है जब हरतालिका तीज और गणपति स्थापना एक ही दिन (सोमवार, 14 सितंबर) पर पड़ रही है। तृतीया तिथि (उदयातिथि और चतुर्थी से युक्त) के कारण आज ही महिलाओं ने तीज का व्रत भी रखा है और घरों में बप्पा का स्वागत भी किया है।
9 साल बाद 12 दिनों का गणेशोत्सव
सामान्यतः गणेशोत्सव 10 दिनों का होता है और 11वें दिन विसर्जन होता है, लेकिन इस बार तिथियों की वृद्धि (चतुर्थी तिथि के विस्तार) के कारण यह उत्सव 12 दिनों का होगा। 14 सितंबर को स्थापना के बाद बप्पा की आराधना का यह सिलसिला 25 सितंबर (अनंत चतुर्दशी) तक चलेगा। ऐसा दुर्लभ महासंयोग पूरे 9 साल बाद बना है।
स्थापना का शुभ मुहूर्त और विशेष राजयोग
- स्थापना मुहूर्त: सुबह 10:50 बजे से दोपहर 1:18 बजे तक।
- विसर्जन: 25 सितंबर (अनंत चतुर्दशी)।
- शुभ योग: इस वर्ष गणेश उत्सव के दौरान मालव्य, भद्र, हंस, रवि और बुध-अरुण के संयोग से नवपंचम राजयोग का निर्माण हो रहा है, जो सभी भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी और सफलतादायक सिद्ध होगा।










