भारतीय सराफा बाजार में पिछले एक महीने से भी कम समय में सोने और चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 15 जून 2026 को जो 24 कैरेट सोना ₹1,54,180 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर कारोबार कर रहा था, वह आज 11 जुलाई 2026 को भारी बिकवाली के चलते गिरकर ₹1,44,010 पर आ गया है. महज 26 दिनों के भीतर सोने की कीमतों में ₹10,170 प्रति 10 ग्राम (लगभग 6.60%) की बड़ी कटौती दर्ज की गई है.
दूसरी ओर, औद्योगिक मांग और खुदरा खरीदारों के मोर्चे पर चांदी की कीमतों में राहत और भी बड़ी रही है. 15 जून को चांदी ₹2,53,170 प्रति किलोग्राम की अभूतपूर्व ऊंचाई पर थी, जो आज अंतरराष्ट्रीय बाजार के भारी दबाव में लुढ़ककर ₹2,22,960 पर बंद हुई. यानी निवेशकों और आभूषण निर्माताओं के लिए चांदी सीधे ₹30,210 प्रति किलोग्राम (लगभग 11.93%) सस्ती हो चुकी है.
मिडिल ईस्ट में जंग के बावजूद कीमतों पर लगा ब्रेक
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक मोर्चे पर बड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के बावजूद यह बड़ी गिरावट देखने को मिली है. हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका (US) द्वारा ईरान पर किए गए नए सैन्य हमलों और अमेरिकी ठिकानों पर हुए जवाबी हमलों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्ष विराम को “प्रभावी रूप से समाप्त” घोषित कर दिया है. इस तनाव ने बाजार में कुछ समय के लिए रिस्क प्रीमियम जरूर बढ़ाया, लेकिन अमेरिकी फेडरल रिजर्व के बेहद सख्त रुख ने कीमतों की इस तेजी पर कड़ा ब्रेक लगा दिया.
ब्याज दरों और डॉलर की मजबूती का दोहरा दबाव
फेडरल रिजर्व की हालिया नीतिगत बैठक से यह साफ संकेत मिले हैं कि अमेरिका में महंगाई अभी भी अनुमान से कहीं अधिक जिद्दी बनी हुई है. ऊर्जा और टैरिफ से इतर अब परिवहन, हवाई किराए और सेवाओं जैसे व्यापक आर्थिक क्षेत्रों में भी कीमतों का दबाव बढ़ रहा है. विश्लेषकों के मुताबिक, इन मिनट्स ने बाजार में इस धारणा को मजबूत किया है कि फेडरल रिजर्व आने वाले समय में ब्याज दरों को लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनाए रखेगा. इसके साथ ही लगातार मजबूत होते अमेरिकी डॉलर इंडेक्स ने सोने और चांदी की घरेलू और वैश्विक रिकवरी को पूरी तरह रोक दिया है.









