बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि नाबालिग की संपत्ति बेचने की अनुमति देने का अधिकार फैमिली कोर्ट के पास नहीं, बल्कि जिला न्यायालय के पास होता है। कोर्ट ने कबीरधाम जिले के एक मामले में सुनवाई करते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराया और अपील को खारिज कर दिया।
क्या है पूरा मामला
मामला कबीरधाम जिले के ग्राम डबराभाठ का है, जहां मां रुखमणी ओगरे ने अपने दो नाबालिग बच्चों की पढ़ाई के लिए उनकी संयुक्त जमीन बेचने की अनुमति मांगी थी। इसके लिए उन्होंने फैमिली कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत किया, लेकिन कोर्ट ने अधिकार क्षेत्र न होने का हवाला देते हुए आवेदन खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट में दी गई चुनौती
फैमिली कोर्ट के इस फैसले को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि फैमिली कोर्ट को इस मामले में सुनवाई का अधिकार होना चाहिए, जबकि राज्य सरकार की ओर से इसका विरोध किया गया।
डिवीजन बेंच की अहम टिप्पणी
डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि फैमिली कोर्ट का अधिकार क्षेत्र केवल अभिभावकत्व, संरक्षकता और बच्चों की कस्टडी तक सीमित है। नाबालिग की संपत्ति से जुड़े मामलों में अनुमति देने का अधिकार कानूनन जिला न्यायालय को ही प्राप्त है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट, 1956 के प्रावधानों के अनुसार नाबालिग की अचल संपत्ति बेचने से पहले जिला न्यायालय से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है।
अपील खारिज, लेकिन दी राहत
हाईकोर्ट ने अपील को खारिज करते हुए भी याचिकाकर्ताओं को राहत दी है। कोर्ट ने उन्हें संबंधित जिला न्यायालय में नया आवेदन प्रस्तुत करने की अनुमति दी, जिस पर कानून के अनुसार विचार किया जाएगा।










