सर्वोच्च न्यायालय में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड के रूप में प्रैक्टिस कर रहे श्री कौस्तुभ शुक्ला को विधि के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 3 नवंबर 2026 को आयोजित राज्य अलंकरण समारोह में वर्ष 2026 के ‘बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल सम्मान’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान छत्तीसगढ़ राज्य में विधि के क्षेत्र का सर्वोच्च सम्मान है, जो उनके विधिक योगदान एवं उपलब्धियों को मान्यता प्रदान करता है।
सर्वोच्च न्यायालय में अपनी पेशेवर भूमिका के साथ-साथ वे छत्तीसगढ़ से जुड़े विधायी, प्रशासनिक एवं नीतिगत विषयों में भी सक्रिय सहभागिता निभाते रहे हैं। राज्य में आपराधिक न्याय व्यवस्था, विधिक सुधार तथा प्रशासनिक व्यवस्थाओं के विकास एवं संशोधन से जुड़े विषयों पर अपनी विधिक समझ और अनुभव के माध्यम से सुझाव एवं विचार साझा करते रहे हैं ।
श्री शुक्ला मूलतः रायपुर, छत्तीसगढ़ के निवासी हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा भिलाई में हुई। उन्होंने बी.एस.पी. सीनियर सेकेंडरी स्कूल के सेक्टर-X से स्कूली शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने सिम्बायोसिस लॉ स्कूल, पुणे से बी.ए. एलएल.बी. की डिग्री हासिल की तथा दिल्ली से विधि में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की।

उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य अधिवक्ता परिषद में अधिवक्ता के रूप में पंजीयन के साथ अपने विधिक करियर की शुरुआत की। इसके पश्चात उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस प्रारंभ की और अपनी मेहनत एवं अनुभव के बल पर सर्वोच्च न्यायालय में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड की अर्हता हासिल की। अपने पेशेवर कार्यकाल में वे सर्वोच्च न्यायालय के अनेक रिपोर्टेड निर्णय में अधिवक्ता के रूप में उपस्थित रहे हैं। उन्हें संवैधानिक एवं सार्वजनिक महत्व के विभिन्न प्रश्नों पर सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठों के समक्ष भी अपनी दलीलें प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त हुआ है।
सर्वोच्च न्यायालय में प्रैक्टिस के अलावा अधिवक्ता समुदाय के संस्थागत कार्यों में उनकी भागीदारी भी उल्लेखनीय रही है। वर्ष 2024 से 2026 तक वे सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) के संयुक्त सचिव रहे। उल्लेखनीय है कि वे छत्तीसगढ़ से इस प्रतिष्ठित एसोसिएशन में संयुक्त सचिव का पद संभालने वाले पहले अधिवक्ता हैं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड के पेशेवर हितों, सर्वोच्च न्यायालय में फाइलिंग, पंजीयन, सूचीबद्धता, ऑनलाइन सुनवाई तथा रजिस्ट्री से संबंधित प्रक्रियात्मक विषयों पर विभिन्न पहलों में योगदान दिया। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय विधिक सम्मेलनों तथा युवा अधिवक्ताओं और विधि विद्यार्थियों के लिए आयोजित शैक्षणिक कार्यक्रमों में भी उनकी सहभागिता रही है,।

विधिक सहायता के क्षेत्र में भी श्री शुक्ला की सक्रिय भागीदारी रही है। वे सर्वोच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति से विधिक सहायता अधिवक्ता के रूप में जुड़े रहे हैं।
श्री शुक्ला एक प्रतिष्ठित एवं सेवाभावी परिवार से संबंध रखते हैं। उनके पिता स्वर्गीय चंद्र प्रकाश शुक्ला ने राज्य पुलिस सेवा में लगभग चार दशक तक सेवाएँ दीं और पुलिस अधीक्षक, लोक आयोग के पद से सेवानिवृत्त हुए। उनकी माता श्रीमती दीप्ति शुक्ला गृहिणी हैं। उनके भाई श्री अंकित शुक्ला केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में असिस्टेंट कमांडेंट हैं। श्री शुक्ला की पत्नी श्रीमती रोली शुक्ला एक प्रतिष्ठित वैश्विक कंपनी में डायरेक्टर – आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के पद पर कार्यरत हैं।
बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल सम्मान के लिए श्री शुक्ला का चयन उनके विधिक अनुभव, सर्वोच्च न्यायालय में पेशेवर योगदान और अधिवक्ता समुदाय के बीच उनकी भूमिका को मान्यता देता है। छत्तीसगढ़ से अपना सफर शुरू कर देश की सर्वोच्च अदालत में प्रैक्टिस स्थापित करने के साथ-साथ अपने गृह राज्य से जुड़े रहना उनके पेशेवर जीवन का एक महत्वपूर्ण पक्ष रहा है। उनका चयन विधि के क्षेत्र में उनके योगदान तथा राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की विधिक प्रतिभा के प्रतिनिधित्व को रेखांकित करता है।









