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बिलासपुर जिला अस्पताल में बड़ी लापरवाही: डायलिसिस के दौरान मरीज को घंटों अकेला छोड़ा, फर्श पर बहता रहा खून; मचा हड़कंप

बिलासपुर: न्यायधानी के जिला अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को ताक पर रखने वाली एक बेहद हैरान करने वाली लापरवाही सामने आई है। अस्पताल के डायलिसिस वार्ड में इलाज के दौरान एक मरीज को घंटों भगवान भरोसे अकेला छोड़ दिया गया। इस लापरवाही के चलते मरीज के शरीर का खून डायलिसिस मशीन से लीक होकर फर्श पर बहता रहा। गनीमत रही कि समय रहते मरीज की नींद खुल गई और उसने शोर मचाया, जिससे उसकी जान बाल-बाल बच गई।

निगरानी के बजाय गायब रहे ड्यूटी कर्मचारी

जानकारी के मुताबिक, पीड़ित मरीज का जिला अस्पताल में नियमित रूप से डायलिसिस किया जाता है। हमेशा की तरह वह अपने निर्धारित समय पर अस्पताल पहुंचा था, जहाँ उसे डायलिसिस मशीन से कनेक्ट किया गया। आरोप है कि इसके बाद वहां ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मचारियों ने मरीज पर नजर रखने के बजाय लापरवाही दिखाई और वार्ड छोड़कर बाहर चले गए। इस दौरान वार्ड में कोई भी जिम्मेदार अटेंडेंट या स्टाफ मौजूद नहीं था।

सोते समय पाइप से रिसता रहा खून

डायलिसिस की लंबी प्रक्रिया के दौरान मरीज को गहरी नींद आ गई। इसी बीच तकनीकी खराबी या सुई/पाइप के हिलने के कारण मशीन से शरीर में वापस जाने वाला खून बाहर की तरफ लीक होने लगा। देखते ही देखते मरीज के शरीर का काफी खून रिसकर वार्ड के फर्श पर फैल गया। विडंबना यह रही कि काफी देर तक खून बहता रहा, लेकिन अस्पताल के किसी भी स्टाफ को इसकी भनक तक नहीं लगी।

मरीज के शोर मचाने पर दौड़ा स्टाफ, टला बड़ा हादसा

अचानक जब मरीज की नींद खुली, तो फर्श पर अपना खून फैला देख उसके होश उड़ गए। उसने तुरंत चिल्लाना और शोर मचाना शुरू किया। मरीज की चीख-पुकार सुनकर बाहर मौजूद कर्मचारी आनन-फानन में मौके पर पहुंचे और तुरंत स्थिति को नियंत्रित किया।

अस्पताल प्रबंधन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मरीज को आवश्यक उपचार और मेडिकल सपोर्ट दिया। राहत की बात यह है कि समय पर ध्यान दिए जाने के कारण मरीज की स्थिति फिलहाल सामान्य और खतरे से बाहर बताई जा रही है।

सरकारी दावों और कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इस खौफनाक मंजर और गंभीर लापरवाही के बाद जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली सीधे तौर पर कटघरे में आ गई है। डायलिसिस जैसी संवेदनशील और बेहद क्रिटिकल प्रक्रिया के दौरान मरीजों को बिना किसी अटेंडेंट या मॉनिटरिंग के अकेला छोड़ना किसी बड़े हादसे को आमंत्रण देने जैसा है। स्थानीय लोगों और मरीज के परिजनों ने इस मामले में दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है।

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