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समाधान शिविर में भड़कीं विधायक: खुले मंच से पटवारियों को लताड़ा, बोलीं-“ये तो भगवान बन बैठे हैं, VIDEO

बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मुरकौल में आयोजित ‘समाधान शिविर’ में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब क्षेत्रीय विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते का गुस्सा राजस्व विभाग के अधिकारियों पर फूट पड़ा। शिविर में पहुंचे ग्रामीणों की शिकायतों और लंबे समय से लटके राजस्व मामलों के अंबार को देखकर विधायक ने पटवारी और तहसीलदारों की क्लास लगा दी। उन्होंने खुले मंच से राजस्व अमले को जमकर फटकार लगाते हुए उनके कामकाज के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े किए।


“पटवारी ही गांवों में झगड़ों की जड़ बनते हैं”

समाधान शिविर के दौरान मंच से जनता को संबोधित करते हुए विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते ने राजस्व विभाग के मैदानी अमले पर सीधा और तीखा हमला बोला। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि गांवों में जमीन, आपसी रंजिश और सीमांकन (नापजोख) से जुड़े अधिकांश विवादों की मुख्य वजह खुद राजस्व विभाग की लापरवाही होती है।

विधायक ने तंज कसते हुए कहा, “पटवारी तो आजकल खुद को भगवान समझ बैठे हैं। उन्हें जनता की तकलीफों और उनकी समस्याओं से अब कोई सरोकार नहीं रह गया है।”


“एटीट्यूड छोड़ें अधिकारी, जनता को चक्कर कटवाना बर्दाश्त नहीं”

विधायक ने शिविर में मौजूद पटवारियों और तहसीलदारों को सख्त लहजे में अपनी कार्यप्रणाली सुधारने की नसीहत दी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा:

  • अधिकारी और कर्मचारी अपना ‘एटीट्यूड’ (अहंकार) जेब में रखें और सीधे आम जनता की समस्याओं का निपटारा करें।
  • गरीब ग्रामीणों को छोटे-छोटे कामों के लिए दफ्तरों के चक्कर लगवाना अब बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
  • अगर भविष्य में ऐसी शिकायतें दोबारा आईं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

शिविर में उमड़ा था शिकायतों का सैलाब

दरअसल, मुरकौल के इस समाधान शिविर में आस-पास के गांवों से सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण अपनी लंबित शिकायतें और राजस्व से जुड़ी फाइलें लेकर पहुंचे थे। जब विधायक ने खुद मामलों की समीक्षा की, तो पाया कि महीनों से लोगों के जायज काम भी अटका कर रखे गए हैं। लोगों की इसी बेबसी और परेशानी को देखकर विधायक का पारा चढ़ गया और उन्होंने भरे मंच से ही अधिकारियों को अल्टीमेटम दे दिया।

बड़ा असर: विधायक के इस कड़े रुख के बाद शिविर में मौजूद अधिकारियों के हाथ-पैर फूल गए। अब देखना यह होगा कि इस फटकार के बाद वाड्रफनगर क्षेत्र के राजस्व मामलों में कितनी तेजी आती है और ग्रामीणों को पटवारी राज से कितनी राहत मिलती है।

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