रायपुर। कलेक्टोरेट के रिकॉर्ड रूम में रखे जमीन-जायदाद से जुड़े पुराने दस्तावेज और मिसलबंद की नकल निकालने में लोगों को होने वाली परेशानियां जल्द खत्म हो सकती हैं। जिला प्रशासन अब रिकॉर्ड रूम में मौजूद सभी पुराने दस्तावेजों को ऑनलाइन करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए करीब दो करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसे शासन से मंजूरी मिलने के बाद डिजिटल रिकॉर्ड बनाने का काम शुरू होगा।
नकल निकालने में लग रहा हफ्तों तक का समय
वर्तमान में कलेक्टोरेट रिकॉर्ड रूम से जमीन से जुड़े दस्तावेजों की नकल लेने में लोगों को काफी समय लग रहा है। आवेदन करने के बाद कई बार नकल मिलने में दो दिन से लेकर कई हफ्ते तक लग जाते हैं। पुराने न्यायालयीन मामलों में मिसलबंद की जरूरत पड़ने पर देरी के कारण सुनवाई भी प्रभावित होती है। वहीं, संपत्ति से जुड़े मामलों में पुराने दस्तावेजों की नकल नहीं मिलने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्टाफ की कमी से दस्तावेज तलाशना चुनौती
रिकॉर्ड रूम में वर्तमान दस्तावेजों के साथ-साथ करीब 100 साल पुराने रिकॉर्ड भी मौजूद हैं। बड़ी संख्या में रखे दस्तावेजों के बीच किसी विशेष वर्ष या मामले का रिकॉर्ड तलाशना कर्मचारियों के लिए मुश्किल काम बन जाता है। स्टाफ की कमी के कारण कई बार रिकॉर्ड खोजने में एक-दो दिन से लेकर एक-दो सप्ताह तक का समय लग जाता है।
डिजिटल होने से सुरक्षित रहेंगे पुराने रिकॉर्ड
प्रशासन का मानना है कि रिकॉर्ड ऑनलाइन होने से दस्तावेज सुरक्षित भी रहेंगे। वर्तमान में पुराने कागजी रिकॉर्ड आग, नमी या अन्य कारणों से खराब होने का खतरा बना रहता है। डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने के बाद किसी भी परिस्थिति में दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जा सकेगा।
एक क्लिक पर मिल सकेगी दस्तावेजों की नकल
रिकॉर्ड ऑनलाइन होने के बाद लोगों को नकल शाखा के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी। पोर्टल के माध्यम से संबंधित दस्तावेजों की नकल आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। इससे समय की बचत होगी और रिकॉर्ड प्राप्त करने की प्रक्रिया भी आसान होगी।
गौरतलब है कि जिले की सभी तहसीलों के जमीन रिकॉर्ड पहले ही भुइयां पोर्टल पर ऑनलाइन किए जा चुके हैं, जहां खसरा और ग्राम से जुड़ी जानकारी आसानी से उपलब्ध है। वहीं, पंजीयन विभाग के पुराने रिकॉर्ड भी ऑनलाइन करने की प्रक्रिया जारी है।
दो करोड़ रुपये का बनेगा प्रस्ताव
रायपुर अपर कलेक्टर कीर्तिमान सिंह राठौर ने बताया कि रिकॉर्ड रूम में रखे सभी दस्तावेज-मिसलबंद को ऑनलाइन करने की योजना है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन में करीब दो करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। जल्द ही प्रस्ताव तैयार कर शासन को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।









