रायपुर। देश भर में परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियों के बीच अब रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (रविवि) का नाम भी जुड़ गया है। सोमवार को आयोजित बीए (BA) द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा के दौरान विश्वविद्यालय प्रबंधन की एक बड़ी लापरवाही सामने आई। यहां जेनेरिक इलेक्टिव विषय के अंतर्गत बिजनेस इकोनॉमिक्स की परीक्षा में न सिर्फ पाठ्यक्रम का स्तर बदल दिया गया, बल्कि हिंदी माध्यम के छात्रों को केवल अंग्रेजी में ही प्रश्नपत्र थमा दिया गया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के नियमों के मुताबिक, यदि कोई छात्र अपने संकाय से बाहर का विषय (जेनेरिक इलेक्टिव) चुनता है, तो उसके लिए प्रश्नपत्र का कठिनाई स्तर अपेक्षाकृत कम रखा जाना चाहिए। बीए के जिन छात्रों ने जेनेरिक इलेक्टिव के रूप में ‘बिजनेस इकोनॉमिक्स’ चुना था, उन्हें नियम ताक पर रखकर कॉमर्स और बीबीए (BBA) के मुख्य छात्रों के लिए तैयार किया गया बेहद कठिन प्रश्नपत्र बांट दिया गया।
2. हिंदी में प्रश्नपत्र छापना ही भूला विश्वविद्यालय
लापरवाही यहीं नहीं रुकी; विश्वविद्यालय प्रशासन हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए प्रश्नपत्र का हिंदी अनुवाद छापना ही भूल गया। परीक्षा हॉल में केवल अंग्रेजी माध्यम का पर्चा मिलने से सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को हुई।
- शिक्षकों को करना पड़ा अनुवाद: परीक्षा केंद्रों पर स्थिति को संभालने के लिए वहां मौजूद प्राध्यापक खुद प्रश्नों का हिंदी अनुवाद करने लगे ताकि छात्रों की मदद हो सके। हालांकि, प्रश्नों का स्तर बेहद कठिन होने के कारण छात्रों की समस्या दूर नहीं हो सकी।
- महाविद्यालयों पर बनाया दबाव: अंदरूनी सूत्रों के हवाले से खबर है कि जब कई कॉलेज प्रबंधनों ने इस गड़बड़ी की शिकायत रविवि प्रशासन से की, तो विश्वविद्यालय की ओर से उल्टा उसी गलत और कठिन प्रश्नपत्र को ही छात्रों से जबरन हल करवाने का दबाव बनाया गया।
क्या है नियम और क्यों जरूरी था आसान पेपर?
जेनेरिक इलेक्टिव (JE) का नियम: राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत छात्र अपने मुख्य संकाय से अलग किसी दूसरे संकाय का एक विषय चुन सकते हैं, जिसके अंक अंतिम परिणाम में जुड़ते हैं। चूंकि छात्र दूसरे संकाय के विषय को केवल एक विकल्प के तौर पर पढ़ते हैं, इसलिए उन्हें उसकी उतनी गहरी समझ नहीं होती। इसी वजह से उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि जेनेरिक इलेक्टिव के प्रश्नपत्रों का स्तर आसान रखा जाए। लेकिन रविवि ने इस नियम की सरेआम धज्जियां उड़ा दीं।
“हमें कोई सूचना नहीं मिली” – रविवि पीआरओ
इस पूरी अव्यवस्था और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ के मामले में जब विश्वविद्यालय का पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो रविवि के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) प्रो. राजीव चौधरी ने कहा:
“परीक्षा केंद्रों से इस तरह की दिक्कतों के संदर्भ में फिलहाल कोई आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है। छात्रहित हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और स्थिति की समीक्षा के आधार पर ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।”










