छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्राम पंचायत बेमचा के सरपंच देवेंद्र चंद्राकर को 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी सरपंच को पूछताछ के लिए रायपुर ले जाया गया है।
जमीन विवाद में मांगी गई थी 4 लाख की रिश्वत
मामला बेमचा ग्राम पंचायत के खसरा नंबर 3110/3 से जुड़ा है, जहां करीब 1 एकड़ 92 डिसमिल जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। जानकारी के अनुसार, अजय कुर्रे नामक व्यक्ति ने इस जमीन को अलग-अलग लोगों को बेच दिया था। इनमें से एक हिस्सा महासमुंद के महाप्रभु वल्लभाचार्य महाविद्यालय में लाइब्रेरियन के पद पर कार्यरत सूरज राम रात्रे को भी बेचा गया था।
कुछ माह पूर्व इस जमीन को लेकर अजय कुर्रे और ग्रामीणों के बीच विवाद हुआ, जो बाद में कोतवाली थाना पहुंचा। इस मामले में दोनों पक्षों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी।
इसी बीच सरपंच देवेंद्र चंद्राकर ने जमीन से अतिक्रमण नहीं हटाने और मामले को अपने पक्ष में रखने के एवज में सूरज राम रात्रे से 4 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की। शिकायत के मुताबिक, सरपंच को पहले ही 50 हजार रुपये एडवांस दिए जा चुके थे।
शिकायत के बाद एसीबी ने बिछाया जाल
पीड़ित सूरज राम रात्रे ने इसकी शिकायत रायपुर एसीबी से की। शिकायत में बताया गया कि उसकी पत्नी के नाम पर इंदिरा कॉलोनी क्षेत्र में मकान है, जिसके लिए पहले एनओसी जारी हो चुकी थी, लेकिन वर्तमान सरपंच ने उसे निरस्त कर दिया और काम आगे बढ़ाने के लिए रिश्वत की मांग की।
एसीबी ने शिकायत की पुष्टि के बाद योजना बनाकर कार्रवाई की। 15 सदस्यीय टीम ने महासमुंद पहुंचकर कचहरी चौक पर ट्रैप बिछाया। जैसे ही सरपंच ने दूसरी किश्त के रूप में 1 लाख रुपये लिए, टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई
गिरफ्तारी के बाद आरोपी सरपंच को महासमुंद पुलिस कंट्रोल रूम लाया गया, जहां से उसे आगे की पूछताछ के लिए रायपुर भेजा गया। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया जाएगा।
जांच जारी, और खुलासों की संभावना
एसीबी अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस प्रकरण में अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं। आने वाले समय में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।







