जगदलपुर/सुकमा: बस्तर के जंगलों में दशकों से दहशत का पर्याय रही माओवादी बटालियन अब पूरी तरह बिखर चुकी है। नक्सली कमांडर हिड़मा के सबसे भरोसेमंद साथी और उसकी बटालियन के डिप्टी कमांडर सोढ़ी केशा ने अपने 40 साथियों के साथ तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। 25 लाख रुपये के इनामी केशा का यह समर्पण माओवादी नेटवर्क के उस ‘अंतिम स्तंभ’ का गिरना माना जा रहा है, जिसने सुकमा और बीजापुर के इलाकों में कई बड़े हमलों को अंजाम दिया था।
हथियारों के साथ पहुंचे 40 लड़ाके
जानकारी के अनुसार, सोढ़ी केशा अकेला नहीं आया, बल्कि अपने साथ माओवादी संगठन की पूरी ‘टुकड़ी’ लेकर पहुंचा। सरेंडर करने वालों में डिविजनल कमेटी सदस्य मंगथू, एरिया कमेटी सदस्य महेंद्र और प्लाटून कमांडर मधु जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इन नक्सलियों ने समर्पण के दौरान अपने साथ AK-47, इंसास और SLR जैसे घातक स्वचालित हथियार भी सौंपे हैं।
बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा कि सोढ़ी केशा की टीम के तेलंगाना में सरेंडर की सूचना मिली है और आधिकारिक विवरण का इंतजार है।
कर्रेगुट्टा अभियान ने तोड़ी कमर
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए ‘कर्रेगुट्टा अभियान’ के बाद से ही केशा और उसकी टीम भारी दबाव में थी। जनवरी 2024 में धर्मावरम पुलिस कैंप पर हमला करने के बाद केशा सुरक्षा बलों की हिट लिस्ट में टॉप पर था। नवंबर 2025 में अन्नाराम मुठभेड़ में बाल-बाल बचने के बाद वह लगातार ठिकाने बदल रहा था, लेकिन घेराबंदी इतनी सख्त थी कि उसे हथियार डालने पर मजबूर होना पड़ा।
अब केवल ‘विज्जल’ और ‘रूपी’ ही बाकी
पुलिस के ताजा आकलन के अनुसार, बस्तर में अब माओवादी संगठन का ढांचा लगभग ध्वस्त हो चुका है। हिड़मा की बटालियन के खात्मे के बाद अब केवल दो बड़े नाम सक्रिय बचे हैं।
- विज्जल: जो कर्रेगुट्टा के जंगलों में कहीं छिपा है।
- रूपी: जो उत्तर बस्तर में संगठन को बचाने की नाकाम कोशिश कर रही है।
अमित शाह का लक्ष्य: मार्च 2026 तक ‘नक्सल मुक्त भारत’
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में घोषणा की थी कि देश मार्च 2026 तक माओवादी हिंसा से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में चलाए गए आक्रामक अभियानों में अब तक 500 से अधिक माओवादी मारे जा चुके हैं, जिनमें बसव राजू और गुड्सा उसेंडी जैसे 12 केंद्रीय समिति सदस्य शामिल थे। वहीं, 2900 से अधिक नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है।
- Breaking: बस्तर में नक्सलियों की ‘कंपनी-2’ खत्म, डिप्टी कमांडर सोढ़ी केशा ने डाले हथियार!
- बड़ी खबर: 40 साथियों और AK-47 के साथ नक्सली कमांडर का सरेंडर, माओवाद के ताबूत में आखिरी कील।
- बस्तर डायरी: हिड़मा की सेना हुई कमजोर, अब केवल दो कमांडर बचे; मार्च 2026 तक सफाए का लक्ष्य।
AI का नजरिया: यह खबर बस्तर के उन हजारों आदिवासियों के लिए राहत की बात है जिन्होंने दशकों से हिंसा देखी है। केशा जैसे बड़े कैडर का सरेंडर बताता है कि अब बंदूक की लड़ाई वैचारिक और रणनीतिक रूप से हार चुकी है।
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