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बेमेतरा में अनोखा ब्याह: बैलगाड़ी पर निकली विधायक की बारात, डिप्टी सीएम ने थामी लगाम

बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा में रविवार को एक बेहद अनोखी और ऐतिहासिक शादी देखने को मिली। मुख्यमंत्री कन्या विवाह समारोह के मंच पर जब बेमेतरा के विधायक दीपेश साहू खुद दूल्हा बनकर पहुंचे, तो हर कोई हैरान रह गया। इस विवाह की सबसे खास बात यह रही कि विधायक की बारात आधुनिक गाड़ियों में नहीं, बल्कि पारंपरिक बैलगाड़ी पर निकली, जिसकी लगाम खुद प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने थाम रखी थी।

VIPs की मौजूदगी और कार्यकर्ताओं का उत्साह

इस अनूठी बारात और विवाह समारोह के साक्षी बनने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, कई कैबिनेट मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ विधायक पहुंचे। बेसिक स्कूल मैदान तक निकली इस बारात में छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक साफ देखने को मिली, जहां पारंपरिक ‘परी डांस’ भी हुआ। अपने विधायक को इस सादगी से शादी करते देख कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों में भारी उत्साह देखा गया।


BPL परिवार की तरुणा संग विधायक ने लिए सात फेरे

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत आयोजित इस सामूहिक विवाह कार्यक्रम में विधायक दीपेश साहू ने एक बीपीएल (BPL) परिवार की बेटी तरुणा साहू के साथ सात फेरे लिए। इस भव्य और संवेदनशील आयोजन में विधायक समेत कुल 23 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ। बारात की शुरुआत में सभी दूल्हे पहले ई-रिक्शे से सर्किट हाउस पहुंचे और फिर वहां से बैलगाड़ियों पर सवार होकर विवाह स्थल के लिए रवाना हुए।

“योजना की राशि मेधावी बेटियों की पढ़ाई पर होगी खर्च” शादी के बाद विधायक दीपेश साहू ने एक सराहनीय घोषणा की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत सरकार से मिलने वाली सहायता राशि को वे अपने व्यक्तिगत उपयोग में नहीं लेंगे। इस पूरी राशि को वे क्षेत्र की मेधावी और जरूरतमंद छात्राओं की उच्च शिक्षा और पढ़ाई पर खर्च करेंगे।


अचानक आई तेज बारिश, कुर्सियां और गद्दे बने ‘छतरी’

इस भव्य शादी के बीच मौसम ने अचानक करवट ले ली। फेरों और रस्मों के दौरान ही तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। विवाह स्थल पर वाटरप्रूफ डोम या पुख्ता इंतजाम न होने के कारण वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

सिर पर सेहरा सजाए दूल्हे और सज-धजकर बैठी दुल्हनें खुद को भीगने से बचाने के लिए जद्दोजहद करती नजर आईं। पानी से बचने के लिए जो हाथ लगा, जोड़ों ने उसे ही ओढ़ लिया। कई जोड़ों और उनके परिजनों ने जमीन पर बिछे गद्दों और बैठने के लिए रखी प्लास्टिक की कुर्सियों को ही अपने सिर पर उठा लिया। वहीं कुछ लोग पंडाल के तिरपाल और छातों के सहारे खुद को छुपाते दिखे। मौसम की इस मार के बावजूद विवाह की रस्में पूरी की गईं और यह शादी पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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