रायपुर। राजधानी के नकटी गांव में प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के लिए सोमवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 80 से अधिक मकानों को हटाया। कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। एक हजार से अधिक पुलिस जवान, प्रशासनिक अधिकारी और 20 से 25 जेसीबी मशीनें मौके पर मौजूद रहीं। मकान बचाने के लिए ग्रामीण जेसीबी के सामने खड़े हो गए और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई तथा लोगों को हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।
कार्रवाई के बाद कई परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए। बारिश के मौसम में घर टूटने से प्रभावित परिवारों का सामान सड़क किनारे बिखरा नजर आया। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की भावुक तस्वीरें सामने आईं, जिनमें लोग अपने उजड़े आशियाने को देखकर बिलखते दिखाई दिए।
ग्रामीणों का आरोप है कि दो दिन पहले सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने बारिश के मौसम में मकान नहीं तोड़े जाने का भरोसा दिया था, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन ने कार्रवाई कर दी। इसे लेकर लोगों में नाराजगी और आक्रोश है।
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार अपराध पर नियंत्रण करने में विफल है, लेकिन गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है। रायपुर (पश्चिम) के पूर्व विधायक एवं पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने कहा कि यदि विधायक कॉलोनी बनानी थी तो नया रायपुर में पर्याप्त भूमि उपलब्ध है, वहां निर्माण किया जा सकता था। उन्होंने प्रभावित परिवारों को बेघर करने और जनप्रतिनिधियों पर अपना वादा निभाने में विफल रहने का आरोप लगाया।
वहीं प्रशासन का कहना है कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। करीब 75 परिवारों को नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस आवासों में बसाने की तैयारी की जा रही है।
प्रदेश के मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि पूरे मामले की जानकारी ली जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी परिवार के साथ अन्याय न हो।
नकटी गांव की यह कार्रवाई अब केवल अतिक्रमण हटाने का मामला नहीं रह गई है, बल्कि विकास, पुनर्वास और प्रभावित परिवारों के अधिकारों को लेकर एक बड़ा सार्वजनिक और राजनीतिक मुद्दा बन गई है।








