बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में उस समय धार्मिक और राजनीतिक माहौल गरमा गया, जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का आगमन हुआ। बोदरी स्थित नव-निर्मित भगवान परशुराम भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सनातन धर्म, गौ रक्षा, राजनीति और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बयान दिए, जिससे चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
अपने संबोधन में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सनातन धर्म को बाहरी नहीं, बल्कि अंदरूनी तत्वों से खतरा है। उन्होंने ऐसे लोगों को “कालनेमी” बताते हुए समाज को सतर्क रहने की सलाह दी।
गौ रक्षा के मुद्दे पर उन्होंने नेताओं की कथनी और करनी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कैमरों के सामने बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग होती है।
साथ ही संत समाज को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि संतों को सत्ता के नहीं, बल्कि सत्य के करीब रहना चाहिए।
UGC से जुड़े मुद्दे पर उन्होंने इसे हिंदू समाज को बांटने वाला बताते हुए गंभीर आरोप लगाए और इसे राष्ट्रहित के खिलाफ बताया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शंकराचार्य की आवाज को दबाने के लिए असामाजिक तत्वों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर भी उन्होंने तीखा बयान दिया। स्वामी ने कहा कि योगी “असली हिंदू नहीं हैं” और उन्हें खुद को साबित करने के लिए समय दिया गया था, लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के इन बयानों के बाद राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाएं और तेज हो सकती हैं।










