दंतेवाड़ा। बैलाडीला क्षेत्र के आलनार पहाड़ को बचाने की मांग को लेकर दंतेवाड़ा जिले में ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। बस्तरिया राज मोर्चा के नेतृत्व में स्थानीय ग्रामीणों ने ‘पहाड़ बचाओ पदयात्रा’ की शुरुआत की है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि खनन लीज मिलने के बावजूद वर्षों से कागजों में उत्पादन दिखाया जा रहा है, जबकि जमीन पर खनन गतिविधियां दिखाई नहीं देतीं।
बस्तरिया राज मोर्चा के संस्थापक एवं आदिवासी नेता मनीष कुंजाम के नेतृत्व में रविवार को हिरोली-आलनार पहाड़ से दंतेवाड़ा तक पांच दिवसीय पदयात्रा शुरू हुई। यह यात्रा 7 जून से 11 जून तक चलेगी और दंतेवाड़ा पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बैलाडीला के आलनार पहाड़ को रायपुर स्थित आरती स्पंज एंड पावर लिमिटेड को लीज पर दिया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी पिछले नौ वर्षों से कागजों में लौह अयस्क उत्पादन दर्शा रही है, जबकि मौके पर खनन कार्य नहीं हो रहा है। उनका दावा है कि जिस क्षेत्र में खनन का उल्लेख किया जा रहा है, वहां तक पहुंचने के लिए उचित सड़क या मार्ग भी उपलब्ध नहीं है।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने पूर्व में किरंदुल थाने में आवेदन देकर कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग भी की थी। अब इस मुद्दे को लेकर आंदोलन ने व्यापक रूप ले लिया है।
पदयात्रा के दौरान मनीष कुंजाम ने कहा कि बैलाडीला के पहाड़ आदिवासी समाज की आस्था, संस्कृति और पहचान से जुड़े हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जल, जंगल और जमीन को नुकसान पहुंचाकर खनन कंपनियों को लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि आलनार, नंदराज पहाड़, भांसी डिपॉजिट-4 सहित कई पहाड़ों और वन क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए यह आंदोलन किया जा रहा है।
आंदोलनकारियों ने बोधघाट परियोजना को भी खनन गतिविधियों से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बस्तर की पहचान उसके घने जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों से है। यदि बड़े पैमाने पर खनन और वन कटाई होती है तो इसका सीधा असर पर्यावरण और आदिवासी समुदाय के जीवन पर पड़ेगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।










