राजधानी रायपुर के ग्रामीण इलाके धरसींवा से रिश्तों को शर्मसार करने और कानून की आंख में धूल झोंकने का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिस नाबालिग नातिन को इंसाफ दिलाने के लिए दादा पुलिस और प्रशासन के खिलाफ झंडा बुलंद कर रहा था, उसी दादा ने पर्दे के पीछे आरोपियों के साथ मिलकर पीड़िता की आबरू का सौदा कर लिया। पुलिस ने इस ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए आरोपी दादा समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
अपहरण से शुरू हुई थी कहानी
घटनाक्रम की शुरुआत सिलयारी चौकी क्षेत्र से हुई थी, जहां 13-14 साल की एक नाबालिग लड़की 17 मई को अचानक लापता हो गई थी। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 18 मई को ही बालिका को उसके एक करीबी रिश्तेदार के घर से सुरक्षित बरामद कर लिया था।
शुरुआती जांच, बाल कल्याण समिति और न्यायालय में धारा 193 के तहत दर्ज बयानों में पीड़िता और उसके परिजनों ने किसी भी तरह के अपराध या दुष्कर्म से साफ इनकार कर दिया था, जिसके बाद मामला शांत हो गया था।
₹1.30 लाख में बदला बयान, ऑडियो-वीडियो से खुला राज
आरोपियों के जेल जाने के बाद इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ तब हुआ, जब एक आरोपी की पत्नी ठोस सबूतों के साथ पुलिस के आला अधिकारियों के पास पहुंची। उसने पुलिस को एक वीडियो और ऑडियो क्लिपिंग सौंपी।
चौंकाने वाला सच: जांच में सामने आया कि पीड़िता के दादा ने मुख्य आरोपी ईश्वर घृतलहरे के परिजनों को डरा-धमकाकर मामला दबाने और बयान बदलने के एवज में 1 लाख 30 हजार रुपये नगद वसूले थे। यह पूरी अवैध डील ‘सीताराम मेडिकल स्टोर’ में हुई थी, जिसका बकायदा वीडियो भी बनाया गया था।
₹4 लाख के सरकारी मुआवजे के लालच में फंसा दादा
पुलिस जांच में यह भी पता चला कि आरोपी दादा का लालच यहीं नहीं रुका। जब उसे भनक लगी कि नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में शासन की तरफ से 4 लाख रुपये की सहायता राशि मिलती है, तो उसने इस रकम को हड़पने की नीयत से दोबारा जांच के लिए पुलिस में आवेदन दे दिया।
रायपुर ग्रामीण पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी दादा के पास से जबरन वसूली गई रकम में से 1 लाख रुपये नगद बरामद कर लिए हैं। साथ ही इस षड्यंत्र में बिचौलिये की भूमिका निभाने वाले चंद्रशेखर यदु (मेडिकल स्टोर संचालक) और टुकेन्द्र वर्मा को भी दबोच लिया है।
सिलयारी चौकी प्रभारी सस्पेंड, मुख्य आरोपी जेल में
इस मामले में राजनीति और सामाजिक दबाव बढ़ने के बाद पुलिस प्रशासन ने मामले की नए सिरे से गहन विवेचना शुरू की। शुरुआती जांच में लापरवाही बरतने के कारण सिलयारी चौकी इंचार्ज (उपनिरीक्षक) जितेन्द्र दुबे को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
धरसींवा थाना प्रभारी राजेन्द्र दीवान के अनुसार, पीड़िता के नए बयानों के आधार पर मुख्य आरोपी टाकेश्वर मानिकपुरी और ईश्वर धृतलहरे को दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार कर पहले ही जेल भेजा जा चुका है। वहीं, केस को रफा-दफा करने के लिए ब्लैकमेलिंग करने वाले दादा और दोनों बिचौलियों को भी न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि मामले में कुछ और रसूखदारों के नाम सामने आ सकते हैं।










