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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: शोकसभा के नाम पर पूरे दिन अदालत बंद नहीं हो सकती

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने न्यायिक कार्यप्रणाली को लेकर अहम टिप्पणी की है। 72 वर्षीय बुजुर्ग की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने कहा कि शोकसभा आयोजित करना सम्मानजनक परंपरा है, लेकिन इसके कारण पूरे दिन अदालत की कार्यवाही स्थगित नहीं की जा सकती।

हाईकोर्ट ने कहा कि न्याय तक निर्बाध पहुंच संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का महत्वपूर्ण हिस्सा है। न्यायिक संस्थानों को परंपराओं और आम नागरिकों को समय पर न्याय दिलाने के दायित्व के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।

क्या था मामला?
मामला किराया नियंत्रक न्यायालय से जुड़ा था। 2 फरवरी 2026 को शोकसभा के कारण सुनवाई स्थगित कर दी गई थी। इस आदेश को चुनौती देते हुए 72 वर्षीय बुजुर्ग ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि किसी न्यायिक अधिकारी या अधिवक्ता के निधन पर श्रद्धांजलि देना गरिमापूर्ण परंपरा है, लेकिन इसके आधार पर पूरे दिन न्यायिक कार्य बंद करना उचित नहीं है।

हाईकोर्ट ने शोकसभा के कारण सुनवाई टालने वाले किराया नियंत्रक के आदेश को निरस्त कर दिया और भविष्य में ऐसे मामलों में न्यायिक कार्य प्रभावित न हो, इसका ध्यान रखने के निर्देश दिए।

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