रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली उपभोक्ताओं को अगले महीने से महंगी बिजली का झटका लगने वाला है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई विद्युत दरों को मंजूरी दे दी है, जो 1 जुलाई 2026 से लागू होंगी। आयोग ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में 50 पैसे प्रति यूनिट तक की वृद्धि की है, जबकि गैर-घरेलू और कृषि पंप उपभोक्ताओं के लिए 40 पैसे प्रति यूनिट तक दरें बढ़ाई गई हैं।
राज्य विद्युत नियामक आयोग ने सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नई दरों की घोषणा की। इस दौरान आयोग के सदस्य विनोद गनोदवाले और अजय सिंह मौजूद रहे।
6 हजार करोड़ के घाटे का हवाला देकर बढ़ोतरी का प्रस्ताव
विद्युत वितरण कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए करीब 6,304 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का हवाला देते हुए बिजली दरों में लगभग 24 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव आयोग के समक्ष रखा था। हालांकि विस्तृत जांच और विश्लेषण के बाद आयोग ने केवल 1,662 करोड़ रुपये के घाटे को मान्य माना और औसतन 6.23 प्रतिशत टैरिफ वृद्धि को मंजूरी दी।
आयोग के अनुसार, वितरण कंपनी ने औसत विद्युत प्रदाय दर 8.40 रुपये प्रति यूनिट प्रस्तावित की थी, जबकि आयोग ने इसे घटाकर 7.13 रुपये प्रति यूनिट स्वीकृत किया है। वर्तमान टैरिफ के आधार पर औसत बिलिंग दर 6.71 रुपये प्रति यूनिट आंकी गई है, जो लागत से 42 पैसे कम है।
घरेलू उपभोक्ताओं को सबसे बड़ा असर
नई व्यवस्था के तहत घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में 30 पैसे से 50 पैसे प्रति यूनिट तक की बढ़ोतरी की गई है। इससे लाखों परिवारों के मासिक बिजली बिल में वृद्धि होगी।
वहीं गैर-घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी की गई है। कृषि पंपों के लिए उपयोग होने वाली बिजली भी 40 पैसे प्रति यूनिट महंगी कर दी गई है।
कुछ श्रेणियों को मिली राहत
आयोग ने कई श्रेणियों को राहत भी प्रदान की है। स्थानीय निकायों के कार्यालयों को गैर-घरेलू श्रेणी से हटाकर घरेलू श्रेणी में शामिल किया गया है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ आवास बोर्ड की कॉलोनियों की स्ट्रीट लाइट और सार्वजनिक जल आपूर्ति व्यवस्था को भी घरेलू श्रेणी में स्थानांतरित किया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों, बस्तर, सरगुजा तथा आदिवासी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में संचालित छात्रावासों को भी गैर-घरेलू श्रेणी से हटाकर घरेलू श्रेणी में शामिल किया गया है, जिससे इन संस्थानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
आदिवासी क्षेत्रों के मोबाइल टावरों को विशेष छूट
आयोग ने बस्तर और सरगुजा क्षेत्र के आदिवासी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में स्थापित मोबाइल टावरों को ऊर्जा शुल्क में 25 प्रतिशत की विशेष छूट देने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों में दूरसंचार सेवाओं को बढ़ावा देना है।
नई बिजली दरों के लागू होने के बाद राज्यभर के घरेलू, व्यावसायिक और कृषि उपभोक्ताओं के बिजली बिल में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। हालांकि आयोग का कहना है कि प्रस्तावित 24 प्रतिशत वृद्धि की तुलना में उपभोक्ताओं पर अपेक्षाकृत कम बोझ डाला गया है।










