राजनांदगांव | छत्तीसगढ़ की प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता और पद्मश्री से सम्मानित फूलबासन बाई यादव के अपहरण का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। मंगलवार सुबह चिखली पुलिस की मुस्तैदी और रूटीन चेकिंग की वजह से एक बड़ी वारदात टल गई। पुलिस ने घेराबंदी कर दो महिलाओं सहित तीन आरोपियों को हिरासत में लिया है।
घटना सुबह करीब 10 बजे की है। जानकारी के अनुसार, बेमेतरा की रहने वाली खुशबू साहू अपने दो साथियों के साथ फूलबासन बाई के निवास पर पहुंची थी। आरोपियों ने ‘जरूरी चर्चा’ करने का झांसा देकर उन्हें घर से बाहर बुलाया और बातचीत के दौरान ही जबरन कार में बैठा लिया। कार के अंदर आरोपियों ने फूलबासन बाई के हाथ और मुंह को गमछे से बांध दिया ताकि वे शोर न मचा सकें।
🚨 पुलिस की सतर्कता: ‘मिर्गी’ का बहाना नहीं आया काम
अपहरणकर्ता कार लेकर खैरागढ़ मार्ग की ओर भाग रहे थे, तभी चिखली पुलिस चौकी के पास रूटीन चेकिंग चल रही थी। पुलिस ने जब कार को रोककर तलाशी ली, तो अंदर बंधी हुई स्थिति में एक महिला को देखा। पकड़े जाने के डर से आरोपी महिलाओं ने पुलिस को गुमराह करते हुए कहा कि फूलबासन को ‘मिर्गी का दौरा’ पड़ा है, इसलिए उन्हें बांधा गया है। मौके पर मौजूद एक पुलिसकर्मी ने पद्मश्री फूलबासन बाई को पहचान लिया, जिसके बाद तुरंत उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया और तीनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि मुख्य आरोपी खुशबू साहू स्वयं सहायता समूह से जुड़ी है और पिछले कुछ समय से फूलबासन बाई के संपर्क में थी। पुलिस को जानकारी मिली है कि आरोपी खुशबू बेमेतरा क्षेत्र में महिलाओं को रोजगार के नाम पर समूहों से जोड़कर अवैध वसूली के कार्यों में लिप्त थी। फिलहाल मामला सुकुल दैहान चौकी को सौंप दिया गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस अपहरण के पीछे फिरौती का इरादा था या कोई पुरानी रंजिश।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक गंभीर मामला है। पद्मश्री प्राप्त हस्ती की सुरक्षा और इस पूरी साजिश की तह तक जाने के लिए विशेष टीम पूछताछ कर रही है। आरोपियों के खिलाफ अपहरण और अन्य धाराओं के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।










