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छत्तीसगढ़ महाघोटाला: 3 साल से फरार कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल गिरफ्तार, कोर्ट ने 17 जुलाई तक EOW की रिमांड पर भेजा

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग घोटालों में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को एक बहुत बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। तीन साल से लगातार फरार चल रहे कांग्रेस के पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष और नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) के पूर्व अध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है।

गुरुवार, 9 जुलाई को जांच एजेंसी ने उन्हें विशेष न्यायाधीश सुमित कपूर की अदालत में पेश किया, जहां से कोर्ट ने उन्हें 17 जुलाई तक (8 दिनों की) EOW की हिरासत (रिमांड) में भेज दिया है।

बेटे से पूछताछ के बीच खुद पहुंचे EOW दफ्तर

इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी का घटनाक्रम बेहद नाटकीय रहा। कस्टम मिलिंग घोटाले की जांच के सिलसिले में EOW ने रामगोपाल अग्रवाल को समन जारी किया था। इसके तहत मंगलवार को EOW की टीम ने उनके बेटे वैभव अग्रवाल को हिरासत में लेकर दफ्तर में कई घंटों तक कड़ी पूछताछ की। बेटे पर कसते शिकंजे को देख, अगले ही दिन यानी बुधवार को रामगोपाल अग्रवाल खुद EOW मुख्यालय पहुंच गए, जहां लंबी पूछताछ के बाद जांच एजेंसी ने उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। बाद में उनके बेटे वैभव को छोड़ दिया गया।

देश भर के मंदिरों में कटी 3 साल की फरारी

जांच एजेंसियों के मुताबिक, गिरफ्तारी और वारंट से बचने के लिए रामगोपाल अग्रवाल पिछले तीन वर्षों से लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे। रायपुर छोड़ने के बाद वे सबसे पहले ओडिशा पहुंचे, जहां उन्होंने पुरी और भुवनेश्वर के मंदिरों में दर्शन किए। इसके बाद वे उत्तर प्रदेश के वाराणसी और प्रयागराज सहित तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में छिपते रहे। लगातार राज्य बदलने के कारण वे एजेंसियों की पकड़ से बाहर थे, लेकिन इस दौरान वे अपने परिवार और कुछ चुनिंदा नेताओं व कारोबारियों के संपर्क में थे।

800 करोड़ रुपये का ‘बोरी और कार्टन’ वाला हवाला नेटवर्क!

EOW और ED की जांच में इस मामले को लेकर चौंकाने वाले दावे सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, पार्टी फंड के नाम पर करीब 800 करोड़ रुपये की अवैध उगाही की गई थी। इस रकम को कथित तौर पर बोरियों और कार्टन में भरकर हवाला नेटवर्क के जरिए दिल्ली भेजा जाता था।

मामले में कांग्रेस के एक अकाउंटेंट और रामगोपाल अग्रवाल के निजी सहायक (PA) देवेंद्र डड़सेना के बयान भी जांच का अहम हिस्सा हैं। डड़सेना ने कथित तौर पर यह कबूला है कि घोटाले की मोटी रकम पहले कांग्रेस भवन पहुंचती थी और वहां से इसे आगे पार्टी फंड में डायवर्ट किया जाता था।

तीनों बड़े घोटालों के खुलेंगे राज

रामगोपाल अग्रवाल छत्तीसगढ़ के तत्कालीन रसूखदार नेताओं और अफसरों के बेहद करीबी माने जाते थे। अब 17 जुलाई तक की रिमांड के दौरान EOW उनसे प्रदेश के तीन सबसे बड़े घोटालों—शराब घोटाला, कोल लेवी घोटाला और कस्टम मिलिंग घोटाला—के संबंध में विस्तृत पूछताछ करेगी। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि इस पूछताछ से इस पूरे सिंडिकेट, हवाला नेटवर्क और इसमें शामिल कई अन्य सफेदपोशों के चेहरों से नकाब उतरेगा।

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