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हौसले के आगे बौनी हुई आर्थिक तंगी: बच्चे को RTE में दाखिला दिलाने 3 फीट की दिव्यांग मां पहुंची कलेक्ट्रेट

पेंड्रा। छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो एक मां के संघर्ष, अटूट जज्बे और अपने बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए किए जा रहे प्रयासों की मिसाल है। ग्राम पंचायत सारबहरा की रहने वाली रेशमा वंशकार शारीरिक रूप से दिव्यांग होने के बावजूद अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं। उनके इस जज्बे को देखकर कलेक्ट्रेट पहुंचे हर शख्स की आंखें नम हो गईं।

3 फीट का कद, लेकिन आसमान से ऊंचे हौसले

रेशमा वंशकार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर परिवार से ताल्लुक रखती हैं। शारीरिक दिव्यांगता के कारण उनकी लंबाई महज तीन फीट के आसपास है। लेकिन अपने बच्चे की पढ़ाई को लेकर उनके हौसले किसी भी शारीरिक या आर्थिक चुनौती से कहीं बड़े हैं। रेशमा का सपना है कि उनका बच्चा शिक्षा के अधिकार (RTE – Right to Education) के तहत किसी अच्छे प्राइवेट स्कूल में निशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करे, ताकि उसका भविष्य संवर सके।

सिस्टम की एक चूक बनी पढ़ाई में रोड़ा

रेशमा के इस नेक सपने के आड़े अब सरकारी सिस्टम की एक लापरवाही आ गई है। रेशमा के अनुसार, उनके आय प्रमाण पत्र में उनकी वार्षिक आय भूलवश 80 हजार रुपये दर्ज कर दी गई है। इतनी अधिक आय दर्ज होने के कारण उन्हें RTE (शिक्षा के अधिकार) के तहत गरीब वर्ग के कोटे से बच्चे का दाखिला कराने में गंभीर तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दस्तावेजों में दर्ज यह गलत जानकारी उनके बच्चे के भविष्य की सबसे बड़ी बाधा बन गई है।

कलेक्ट्रेट पहुंचकर लगाई न्याय की गुहार

अपनी इसी समस्या के समाधान के लिए रेशमा वंशकार हिम्मत जुटाकर सीधे कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी वास्तविक स्थिति रखते हुए आय प्रमाण पत्र में तत्काल संशोधन करने की गुहार लगाई है। रेशमा का कहना है कि यदि समय रहते कागजातों में सुधार हो जाता है, तो उनके बच्चे को स्कूल में प्रवेश मिल जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि वे कठिन परिस्थितियों और शारीरिक चुनौतियों के बाद भी अपने बच्चे की शिक्षा से कोई समझौता नहीं करेंगी।

अब प्रशासनिक संवेदनशीलता का इंतजार

दफ्तरों की चौखट नाप रही इस मजबूर लेकिन हिम्मती मां को देखकर अब हर कोई प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कितनी संवेदनशीलता दिखाता है और कितनी जल्दी त्रुटि में सुधार कर इस मासूम बच्चे के स्कूल जाने का रास्ता साफ करता है।

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