रायपुर। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध और तनाव का सीधा असर अब आम आदमी की जेब और देश की ईंधन व्यवस्था पर पड़ने लगा है। पेट्रोलियम कंपनियों ने देश भर के पेट्रोल पंप संचालकों को मौखिक निर्देश जारी कर पेट्रोल और डीजल के वितरण पर सीमा (Rationing) तय कर दी है। हालांकि, कंपनियों ने इस संबंध में कोई आधिकारिक पत्र जारी नहीं किया है, लेकिन व्हाट्सएप संदेशों के जरिए पंपों को वितरण सीमित करने के निर्देश दिए गए हैं।
तय हुई ईंधन की सीमा: एक बार में 250 लीटर ही मिलेगा डीजल
नए मौखिक निर्देशों के अनुसार, अब किसी भी वाहन को एक दिन में अधिकतम 250 लीटर डीजल और एक व्यक्ति को अधिकतम 50 लीटर पेट्रोल ही दिया जा सकेगा। पंप संचालकों को स्पष्ट किया गया है कि पिछले चार महीनों की औसत बिक्री के आधार पर ही अब ईंधन की सप्लाई की जाएगी। इस कदम से खासकर भारी वाहन चालकों और परिवहन कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।
जेरीकेन और ड्रम में डीजल देने पर सख्ती
ग्रामीण क्षेत्रों में जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए कंपनियों ने सख्त रुख अपनाया है। अब किसानों और छोटे व्यापारियों को जेरीकेन या ड्रम में बड़ी मात्रा में डीजल आसानी से नहीं मिल पाएगा। बिना किसी ठोस कारण के ईंधन का भंडारण करने वालों पर निगरानी बढ़ाई गई है और कुछ स्थानों पर कार्रवाई की खबरें भी सामने आ रही हैं।
परिवहन और महंगाई पर असर की आशंका
डीजल वितरण पर पाबंदी से ट्रांसपोर्ट सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित होने की कगार पर है। ट्रक और बस ऑपरेटरों का कहना है कि लंबी दूरी के सफर के लिए एक बार में 250 लीटर डीजल पर्याप्त नहीं है, जिससे संचालन में देरी होगी। माल ढुलाई में देरी का सीधा असर बाजार में जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे महंगाई बढ़ने की प्रबल आशंका है।
पेट्रोलियम कंपनियों का बढ़ता घाटा
सूत्रों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और घरेलू स्तर पर डीजल की बिक्री पर बढ़ते घाटे के कारण कंपनियां आपूर्ति सीमित कर रही हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
पीएम की अपील और बढ़ती चिंता
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सार्वजनिक मंचों से ईंधन की खपत कम करने की अपील के बाद आम जनता के बीच भविष्य के संकट को लेकर चिंता और गहरी हो गई है। उपभोक्ता अब पेट्रोल और डीजल की किल्लत और कीमतों में उछाल को लेकर आशंकित हैं।










