रायपुर। छत्तीसगढ़ में कस्टम मिलिंग घोटाले की जांच लगातार गहराती जा रही है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने मंगलवार को इस घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कारोबारी अनवर ढेबर के करीबी दीपेन चावड़ा के खिलाफ अदालत में विस्तृत आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया है। जांच में सामने आया है कि चावड़ा ने अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों के लिए करीब 20 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की थी।
ईओडब्ल्यू की जांच में पता चला कि दीपेन चावड़ा मिलर्स से जबरन वसूली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। मिलर्स पर दबाव बनाया जाता था ‘कट प्रथा’ के नाम पर पैसा लिया जाता था। भुगतान रोकने और फर्जी बिल लगाने का खेल चलता था
एजेंसी ने डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग ट्रेल, वित्तीय दस्तावेज और गवाहों के बयानों के आधार पर चावड़ा के खिलाफ मजबूत सबूत जुटाए हैं। आरोप पत्र के अनुसार, वह घोटाले में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध रकम के प्रबंधन में शामिल रहा।
इस घोटाले में ईओडब्ल्यू पहले ही कई बड़े अधिकारियों और कारोबारियों के खिलाफ चालान पेश कर चुका है। फरवरी 2025 में मार्कफेड के तत्कालीन प्रबंध संचालक मनोज सोनी और रोशन चंद्राकर, अक्टूबर 2025 में कारोबारी अनवर ढेबर और रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा और अब दीपेन चावड़ा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होने के बाद जांच का दायरा और व्यापक हो गया है।
29 जनवरी 2025 को ईडी की जानकारी के आधार पर ईओडब्ल्यू ने पहली FIR दर्ज की थी। इसमें रोशन चंद्राकर, रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा, कारोबारी अनवर ढेबर, सिद्धार्थ सिंघानिया, प्रीतिका और अन्य सहयोगी शामिल थे।
कस्टम मिलिंग घोटाले में कई स्तरों पर अनियमितताएँ सामने आईं, 2020–21 से पहले मिलर्स को धान मिलिंग के लिए 40 रुपये/क्विंटल मिलते थे। कांग्रेस सरकार के दौरान यह बढ़कर 120 रुपये/क्विंटल हो गया। मार्कफेड अधिकारियों ने इसी बढ़ी हुई राशि में से 20 रुपये/क्विंटल का कट लेना शुरू कर दिया। जो कट देता था, उसका भुगतान तुरंत किया जाता, जो नहीं देता था, उसका पैसा रोक दिया जाता था। राज्य के करीब 2,700 मिलर्स से 140 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली इसी तरीके से हुई।
जांच में सामने आया मोटे धान को पतला बताना, पतले को मोटा दिखाना, फर्जी बिल बनाना, अनियमित रूप से DO कटिंग, FCI को NAFED/नान के बदले आपूर्ति दिखाना, इन तरीकों से करोड़ों का अवैध लेनदेन हुआ।
ईओडब्ल्यू के पूर्व आरोप पत्र के अनुसार- कमीशन की राशि अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर के पास पहुँचाई जाती थी। रोशन चंद्राकर और सिद्धार्थ सिंघानिया हर जिले में एजेंट तैनात करते थे। वसूली की रकम बीटीआई मैदान, पाम बैलेजियो, बनियान ट्री जैसे होटलों में जमा की जाती थी। इसके बाद यह राशि जेल रोड और शंकर नगर स्थित होटल के रास्ते टुटेजा तक पहुँचाई जाती थी।
चावड़ा अवैध राशि इकट्ठा करने, संचालित करने और उच्च स्तर तक पहुंचाने की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी था। बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन से बड़े पैसे के मूवमेंट के सबूत मिले हैं। कई गवाहों ने भी उसके जरिए मिली वसूली के पैटर्न की पुष्टि की है।
दीपेन चावड़ा के खिलाफ चालान दाखिल होने से मामला और मजबूत हो गया है। जल्द ही कोर्ट में आरोपी के खिलाफ सुनवाई शुरू होने की संभावना है। जांच एजेंसियां अन्य जुड़े हुए व्यक्तियों और धन के प्रवाह को खंगालने में जुटी हैं।










