रायपुर। छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा को लेकर एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। महासमुंद जिले के करणखोल-राचपालपुर क्षेत्र स्थित सोने की खदान की नीलामी प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो गई है। दुर्ग की स्थानीय कंपनी आरके मिनरल्स ने 50 प्रतिशत की सर्वाधिक बोली लगाकर इस बहुमूल्य खदान के खनन अधिकार हासिल कर लिए हैं।
खनिज एवं खनिकर्म विभाग के संचालक रजत बंसल ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि नीलामी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और इससे राज्य सरकार को 100 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त होने की संभावना है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार अगले दो वर्षों के भीतर इस खदान से व्यावसायिक स्तर पर सोना उत्पादन शुरू करने की तैयारी है।
300 किलो से अधिक सोने का अनुमानित भंडार
जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) द्वारा किए गए सर्वेक्षण में करणखोल-राचपालपुर क्षेत्र में 300 किलोग्राम से अधिक सोने का भंडार होने की संभावना जताई गई है। करीब 150 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली यह खदान छत्तीसगढ़ की दूसरी स्वर्ण खदान है जिसकी नीलामी की गई है।
इससे पहले महासमुंद जिले के बागमहरा (सोनाखान) ब्लॉक की नीलामी की जा चुकी है, जिसके खनन अधिकार वेदांता कंपनी को मिले हैं। वहां वर्तमान में पूर्वेक्षण और प्रारंभिक खनन संबंधी गतिविधियां जारी हैं।
भालूकोना में दुर्लभ खनिजों का बड़ा भंडार
महासमुंद जिला केवल सोने के लिए ही नहीं, बल्कि दुर्लभ और रणनीतिक खनिजों के लिए भी तेजी से पहचान बना रहा है। जिले के भालूकोना क्षेत्र में निकल, कॉपर और पैलेडियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की पुष्टि हुई है।
डेक्कन गोल्ड माइंस को आवंटित इस क्षेत्र में अब तक लगभग 1.3 किलोमीटर लंबाई तक दुर्लभ खनिजों की मौजूदगी प्रमाणित की जा चुकी है। सर्वेक्षण में 430 मीटर लंबाई और 200 मीटर से अधिक गहराई तक पेंटलैंडाइट, चाल्कोपायराइट और पायरोटाइट सल्फाइड जैसे उच्च मूल्य वाले अयस्क पाए गए हैं। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों, रक्षा उपकरणों और हाई-टेक उद्योगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
गरियाबंद में हीरों की तलाश तेज
महासमुंद के साथ-साथ गरियाबंद जिले में भी बहुमूल्य खनिजों की खोज और सर्वेक्षण का कार्य तेजी से चल रहा है। गरियाबंद का पायलीखंड क्षेत्र पहले से ही उच्च गुणवत्ता वाले हीरों के लिए प्रसिद्ध रहा है। भू-वैज्ञानिकों की टीम आधुनिक तकनीकों की मदद से नए किम्बरलाइट पाइप्स की खोज में जुटी हुई है, जो हीरों के प्रमुख स्रोत माने जाते हैं।
इसके अलावा महासमुंद जिले के कुछ क्षेत्रों में अलेक्जेंड्राइट और गार्नेट जैसे बहुमूल्य रत्नों की मौजूदगी के संकेत भी मिले हैं। खनिज विभाग इन क्षेत्रों का ब्लॉक निर्धारण कर रहा है ताकि भविष्य में पारदर्शी नीलामी के माध्यम से इन खनिज संपदाओं का दोहन किया जा सके।
बढ़ेगा राजस्व, मिलेगा रोजगार
विशेषज्ञों का मानना है कि सोना, दुर्लभ खनिज और रत्नों के बढ़ते भंडार की खोज से छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख खनिज राज्यों में और मजबूत स्थिति हासिल करेगा। साथ ही इन परियोजनाओं से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।










