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अब मेट्रो में सिगरेट पीने पर नहीं होगी जेल, ऐसे बदल जाएंगे नियम

जन विश्वास (संशोधन) बिल, 2026 लागू होने के बाद कई छोटे अपराधों को गैर-आपराधिक बना दिया गया है. इसी के तहत मेट्रो या सार्वजनिक जगहों पर पहली बार सिगरेट पीने जैसे मामलों में अब जेल की सजा नहीं होगी. इसके बजाय जुर्माना या चेतावनी दी जाएगी. सरकार का मकसद आम लोगों को छोटी गलतियों के लिए कानूनी झंझट से बचाना और कोर्ट का बोझ कम करना है. हालांकि, बार-बार नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी. इससे लोगों की जिंदगी आसान होगी और प्रशासनिक प्रक्रिया भी सरल बनेगी.

जन विश्वास बिल से क्या बदलेगा?
संसद ने हाल ही में जन विश्वास (संशोधन) बिल, 2026 पास किया है. इस कानून के तहत 79 केंद्रीय कानूनों की 784 धाराओं में बदलाव किया गया है. करीब 1,000 छोटे अपराधों को अब गैर-आपराधिक बना दिया गया है, यानी अब इन मामलों में जेल की सजा नहीं होगी. इसका मकसद है लोगों को अनावश्यक कानूनी झंझट से बचाना, सरकारी प्रक्रियाओं को आसान बनाना और कारोबार का माहौल बेहतर करना.

विभागों को क्या निर्देश दिए गए?
सरकार का मानना है कि नए कानून के बाद कई पुराने केस अब जरूरी नहीं रह गए हैं. इसलिए सभी विभागों को सलाह दी गई है कि वे ऐसे मामलों की पहचान करें और कोर्ट में आवेदन देकर उन्हें वापस लें. इससे न्यायपालिका पर दबाव कम होगा और मामलों का जल्दी निपटारा हो सकेगा.

करोड़ों केस हो सकते हैं खत्म
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, छोटे-मोटे अपराधों से जुड़े करीब 5 करोड़ मामले देशभर की अदालतों में लंबित हैं. इनमें से ज्यादातर ऐसे हैं, जिन्हें कोर्ट तक जाने की जरूरत ही नहीं थी. अब उम्मीद है कि नए प्रावधानों के तहत इन मामलों को तेजी से बंद किया जा सकेगा.

किन प्रावधानों में हुआ बदलाव?
जन विश्वास बिल के तहत कई अहम बदलाव किए गए हैं

57 धाराओं में जेल की सजा पूरी तरह खत्म
158 धाराओं में जुर्माना हटाया गया
17 मामलों में सजा कम की गई
113 मामलों में जेल और जुर्माने की जगह सिर्फ पेनल्टी लागू
इसके अलावा मोटर व्हीकल एक्ट और नई दिल्ली नगर परिषद कानून में भी संशोधन प्रस्तावित हैं, जिससे आम लोगों की जिंदगी आसान हो सके.

प्रदूषण नियमों में भी राहत
हवा और ध्वनि प्रदूषण से जुड़े मामलों में पहली बार गलती करने पर सख्त सजा के बजाय चेतावनी या हल्का जुर्माना लगाया जाएगा. हालांकि, बार-बार नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी. कुछ मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस तीन महीने तक सस्पेंड करने का भी प्रावधान है.

राज्यों को भी पहल करने का सुझाव
सरकार ने बताया कि 12 राज्य पहले ही ऐसे कानून लागू कर चुके हैं. बाकी राज्यों को भी छोटे अपराधों को गैर-आपराधिक बनाने के लिए कदम उठाने की सलाह दी गई है. जन विश्वास बिल का उद्देश्य साफ है छोटे मामलों में लोगों को राहत देना, कोर्ट का बोझ घटाना और व्यवस्था को आसान बनाना. अगर यह प्रभावी तरीके से लागू होता है, तो यह आम जनता और कारोबार दोनों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है.

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