बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक गंभीर मामले में रायपुर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश से जवाब तलब किया है। मामला आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक कैदी की सजा माफी याचिका से जुड़ा है, जो मूल रिकॉर्ड गायब होने के कारण लंबे समय से लंबित है। हाईकोर्ट ने इस लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताते हुए एक सप्ताह के भीतर रिकॉर्ड तलाशने या जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी पेश करने के निर्देश दिए हैं।
मामले के अनुसार, नवाब खान उर्फ डैनी उर्फ बाबा खान वर्ष 2011 से हत्या के एक मामले में दोषसिद्ध होने के बाद आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराए गए कैदी ने सजा में छूट (रिमिशन) के लिए आवेदन किया है, लेकिन मूल न्यायालयीन रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण उसकी याचिका पर आगे कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया कि जेल अधीक्षक द्वारा रिकॉर्ड मांगे जाने पर रायपुर जिला एवं सत्र न्यायालय के सक्षम अधिकारी ने लिखित रूप से सूचित किया कि मामले का मूल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है और उसकी जानकारी नहीं मिल पा रही है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने इस मामले को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए कहा कि 16 वर्ष से जेल में बंद कैदी की सजा माफी याचिका पर केवल रिकॉर्ड गायब होने के कारण निर्णय नहीं हो पाना न्याय के हित में नहीं है।
हाईकोर्ट ने रायपुर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश से पूछा है कि वर्ष 2011 में निर्णयित इस मामले का मूल रिकॉर्ड आखिर गायब कैसे हुआ। अदालत ने एक सप्ताह के भीतर रिकॉर्ड खोजकर प्रस्तुत करने और 29 जुलाई 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही स्पष्ट किया है कि यदि रिकॉर्ड नहीं मिलता है, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी भी अदालत को देनी होगी।








