रायपुर, 13 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में सड़क, स्कूल-कॉलेज और अन्य सार्वजनिक भवनों के निर्माण को लेकर राज्य सरकार अब भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर योजना तैयार करेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को प्रदेश के सड़क नेटवर्क का विस्तृत सर्वे कराने, निर्माण कार्यों की समय-सीमा तय करने और सार्वजनिक परिसंपत्तियों के नियमित रखरखाव की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए।
मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि अधोसंरचना का निर्माण केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि बढ़ती आबादी, औद्योगिक विकास, आर्थिक गतिविधियों और आने वाले दशकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में होने वाले पूंजीगत निवेश का अधिकतम लाभ अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों तक पहुंचना चाहिए।
दो लेन और चार लेन सड़कों के लिए होगा सर्वे
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश में सड़क नेटवर्क के दीर्घकालिक विकास पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्यभर में यातायात की मौजूदा स्थिति, बढ़ती आबादी, औद्योगिक क्षेत्रों और नए आर्थिक केंद्रों की जरूरतों का आकलन किया जाए।इसके आधार पर यह तय किया जाएगा कि किन मार्गों को दो लेन और किन सड़कों को चार लेन में विकसित करने की आवश्यकता है। सर्वे के बाद भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सड़क नेटवर्क का मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर सड़क संपर्क से आवागमन आसान होने के साथ कृषि उत्पादों के परिवहन, व्यापार, उद्योग, पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा मिलता है। इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों, शहरों, औद्योगिक क्षेत्रों और प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करना जरूरी है।
बजट मिलने के बाद भी नहीं होनी चाहिए देरी
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी निर्माण परियोजना के लिए केवल बजट स्वीकृत होना पर्याप्त नहीं है। परियोजना को समय पर पूरा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।उन्होंने योजना तैयार करने, बजट प्रावधान, प्रशासकीय और तकनीकी स्वीकृति, निविदा प्रक्रिया, कार्यादेश जारी करने तथा निर्माण पूरा होने तक प्रत्येक चरण की समय-सीमा निर्धारित करने को कहा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि परियोजनाओं में अनावश्यक देरी से लागत बढ़ती है और नागरिकों को मिलने वाली सुविधाएं भी प्रभावित होती हैं। इसलिए नियमित समीक्षा कर विलंब के कारणों को समय रहते दूर किया जाए। साथ ही निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
सड़क बनाने के साथ रखरखाव पर भी रहेगा जोर
बैठक में सड़कों, सरकारी भवनों और अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों के रखरखाव को लेकर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माण पर बड़ी राशि खर्च करने के बाद यदि समय पर मरम्मत और निरीक्षण नहीं किया जाता, तो छोटी खराबियां आगे चलकर बड़ी समस्या बन जाती हैं।उन्होंने परियोजनाओं की योजना बनाते समय ही उनके दीर्घकालिक रखरखाव की व्यवस्था तय करने के निर्देश दिए। नियमित निरीक्षण और समयबद्ध मरम्मत से परिसंपत्तियों की कार्यशील आयु बढ़ेगी तथा सरकारी संसाधनों की बचत होगी।
स्कूल-कॉलेज के भवनों में भविष्य की जरूरतों का भी ध्यान
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल, कॉलेज और अन्य सार्वजनिक भवनों की डिजाइन तैयार करते समय केवल वर्तमान आवश्यकताओं को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। आने वाले वर्षों में विद्यार्थियों और उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ने तथा नई सुविधाओं की जरूरत को ध्यान में रखकर निर्माण की योजना बनाई जाए।भवनों में भविष्य के विस्तार, सुरक्षा, सुगम पहुंच और रखरखाव की व्यवस्था पहले से शामिल करने पर जोर दिया गया। इससे बाद में अतिरिक्त निर्माण पर होने वाले अनावश्यक खर्च को कम किया जा सकेगा।
आधुनिक तकनीक से होगा निर्माण, इंजीनियरों की बढ़ेगी दक्षता
मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों में आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण सामग्री और बेहतर कार्यप्रणालियों को अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से दूसरे राज्यों में अपनाए जा रहे सफल नवाचारों और निर्माण तकनीकों का अध्ययन कर उन्हें छत्तीसगढ़ की स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप लागू करने को कहा।इसके साथ ही इंजीनियरों और तकनीकी अधिकारियों के नियमित प्रशिक्षण तथा कौशल उन्नयन के लिए संस्थागत व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधोसंरचना को टिकाऊ बनाने के साथ जलवायु संबंधी चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाना भी जरूरी है।
एकीकृत डिजिटल व्यवस्था से होगी परियोजनाओं की निगरानी
मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन के तहत सार्वजनिक अधोसंरचना से जुड़ी योजना, वित्तपोषण, स्वीकृति, निविदा, निर्माण, निगरानी और रखरखाव की प्रक्रियाओं में सुधार की दिशा में काम किया जाएगा।बैठक में विभिन्न विभागों की परियोजनाओं को एकीकृत डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की योजना पर भी चर्चा हुई। इससे परियोजनाओं की भौतिक और वित्तीय प्रगति के साथ निर्धारित समय-सीमा की निगरानी करना आसान होगा।प्रदेश में उपलब्ध अधोसंरचना का समग्र आकलन कर जरूरत और उपलब्धता के बीच अंतर की पहचान भी की जाएगी, ताकि वास्तविक आवश्यकताओं के आधार पर परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा सके।
‘अंजोर विजन 2047’ के अनुरूप विकसित होगा छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार ‘अंजोर विजन 2047’ के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है। इसके लिए सभी पूंजीगत व्यय वाले विभागों को स्पष्ट प्राथमिकताओं और साझा विकास दृष्टि के साथ काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि अधोसंरचना की सफलता केवल इस बात से नहीं मापी जानी चाहिए कि कितने किलोमीटर सड़क बनी या कितने भवन तैयार हुए। असली सफलता इस बात में है कि इन सुविधाओं से नागरिकों का जीवन कितना आसान हुआ, आर्थिक गतिविधियों को कितनी गति मिली और रोजगार के कितने नए अवसर पैदा हुए।
मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और विकास कार्यों से नागरिकों को मिलने वाले लाभ की जानकारी व्यापक रूप से लोगों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया।बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा सहित विभिन्न विभागों के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।










