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सूरजपुर में अनोखी शादी: अच्छी बारिश के लिए ग्रामीणों ने रचाया मेंढक-मेंढकी का विवाह, ढोल-नगाड़ों के साथ निकली बारात

सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से लोक आस्था और संस्कृति की एक बेहद दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। जिले के प्रतापपुर जनपद अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत खुंसी में अच्छी बारिश की कामना को लेकर सदियों पुरानी लोक परंपरा एक बार फिर जीवंत हो उठी। यहाँ ग्रामीणों ने पूरे विधि-विधान, वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ बाकायदा मेंढक और मेंढकी का विवाह कराया। इस अनोखे और अनूठे आयोजन को देखने के लिए गांव सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए।

दूल्हा-दुल्हन की तरह सजे मेंढक-मेंढकी, गूंजे मंगल गीत

ग्राम खुंसी में सुबह से ही इस अनोखे विवाह को लेकर भारी उत्साह देखा गया। मेंढक और मेंढकी को बकायदा दूल्हा-दुल्हन की तरह सजाया गया था। इंसानी शादियों की तरह ही यहाँ भी हल्दी की रस्म से लेकर मंडप गाड़ना, वर-वधू पक्ष का गठन और फेरों जैसी सभी पारंपरिक रस्में पूरी श्रद्धा के साथ निभाई गईं।

यही नहीं, शादी के दौरान ढोल-नगाड़ों की धुन पर भव्य बारात भी निकाली गई, जिसमें ग्रामीण जमकर नाचते-गाते नजर आए। वहीं, गांव की महिलाओं ने पारंपरिक मंगल गीत गाकर इस विवाह को संपन्न कराया। इस आयोजन के लिए आसपास के कई गांवों के लोगों को भी न्योता दिया गया था, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बन गया।

इंद्रदेव को प्रसन्न करने की है सदियों पुरानी मान्यता

बुजुर्ग ग्रामीणों के अनुसार, सरगुजा अंचल में यह अनूठी परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। ऐसी अटूट मान्यता है कि जब भी मानसून में देरी होती है, समय पर बारिश नहीं होती और किसानों के खेत सूखने लगते हैं, तब वर्षा के देवता इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए मेंढक और मेंढकी का विवाह कराया जाता है। ग्रामीणों का अटूट विश्वास है कि इतिहास में जब-जब यह आयोजन हुआ है, तब-तब क्षेत्र में झमाझम बारिश हुई है, जिससे किसानों की सूखती फसलों को नया जीवन मिला है।

प्रकृति के प्रति सम्मान और सामूहिक आस्था का प्रतीक

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक कर्मकांड या अंधविश्वास नहीं है, बल्कि यह गांव की एकजुटता, प्रकृति के प्रति सम्मान और किसानों की खुशहाली की सामूहिक कामना का एक सुंदर प्रतीक है। यही वजह है कि आज के आधुनिक दौर में भी पूरा गांव इस परंपरा को पूरे उत्साह और आस्था के साथ सहेज कर रखे हुए है। मेंढक-मेंढकी का विवाह समारोह धूमधाम से संपन्न होने के बाद अब ग्रामीणों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। सभी को पूरी उम्मीद है कि इंद्रदेव जल्द ही प्रसन्न होंगे और क्षेत्र में झमाझम बारिश की फुहारें बरसेंगी।

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