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छत्तीसगढ़ में भाड़ा नियंत्रण का संशोधित कानून लागू, किराए में अब 5 से 10% तक सालाना बढ़ोतरी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भाड़ा नियंत्रण से जुड़ा संशोधित कानून अब लागू हो गया है। विधानसभा से संशोधन विधेयक पारित होने और राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद नए प्रावधान प्रभावी हो गए हैं। नए कानून में मकान के किराए में सालाना बढ़ोतरी की सीमा तय करने के साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले किराएदार की बेदखली का भी प्रावधान किया गया है।

किराए में सालाना बढ़ोतरी की सीमा तय

नए प्रावधानों के मुताबिक मकान मालिक और किराएदार के बीच हुए समझौते के आधार पर किराए में हर साल बढ़ोतरी की जा सकेगी। हालांकि, इसके लिए अधिकतम सीमा निर्धारित की गई है।

  • 2 हजार रुपये या उससे कम मासिक किराए पर अधिकतम 5 प्रतिशत सालाना वृद्धि की जा सकेगी।
  • 2 हजार रुपये से अधिक मासिक किराए पर अधिकतम 10 प्रतिशत सालाना वृद्धि की जा सकेगी।

इससे मकान मालिकों और किराएदारों के बीच किराए में बढ़ोतरी को लेकर स्पष्टता रहने की उम्मीद है।

नियम तोड़ने पर किराएदार की हो सकेगी बेदखली

नए कानून में किराएदार द्वारा नियमों का उल्लंघन करने या परिसर में गंभीर गड़बड़ी करने की स्थिति में बेदखली का प्रावधान किया गया है। मकान मालिक ऐसे मामलों में भाड़ा नियंत्रक के समक्ष आवेदन कर सकेगा।

बेदखली के प्रमुख आधारों में किराए का लगातार भुगतान नहीं करना, किराए के परिसर को गंभीर नुकसान पहुंचाना और परिसर या सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने, कचरा फेंकने या अन्य असामाजिक गतिविधियों के जरिए आसपास का माहौल खराब करना शामिल है।

मकान मालिक नियुक्त कर सकेगा प्रॉपर्टी मैनेजर

संशोधित कानून के तहत मकान मालिक अपने परिसर के प्रबंधन के लिए प्रॉपर्टी मैनेजर नियुक्त कर सकेंगे। इसकी लिखित सूचना किराएदार को देना जरूरी होगा। प्रॉपर्टी मैनेजर किराए की रसीद जारी करने, किराया वसूलने और जरूरी मरम्मत जैसे काम संभाल सकेगा।

60 दिन में मामले के निपटारे का प्रयास

किराए से जुड़े विवादों के जल्द निपटारे के लिए भी प्रावधान किए गए हैं। आवेदन मिलने के बाद 60 दिनों के भीतर मामले का फैसला करने का प्रयास किया जाएगा। सुनवाई के दौरान किसी भी पक्ष को तीन से अधिक स्थगन नहीं दिए जाएंगे।

इसके अलावा किराए से जुड़े मामलों में किसी प्रावधान को लेकर अस्पष्टता होने पर उसका लाभ किराएदार को देने का प्रावधान है, जबकि कब्जा वापस लेने से जुड़े मामलों में इसका लाभ मकान मालिक को मिलेगा।

नए कानून के लागू होने से मकान मालिक और किराएदार के बीच किराया, प्रबंधन, बेदखली और विवादों के निपटारे से जुड़े नियमों में स्पष्टता आने की उम्मीद है।

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