रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 570 करोड़ रुपये के कथित कोल लेवी घोटाले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने जांच आगे बढ़ाते हुए रायपुर की विशेष अदालत में 9 हजार से अधिक पन्नों का छठा पूरक चालान पेश किया है। चार्जशीट में खैरागढ़ उपचुनाव के दौरान आयोजित कवि एवं वक्ता डॉ. कुमार विश्वास के ‘हमर भांचा राम’ कार्यक्रम का भी उल्लेख किया गया है।
EOW के अनुसार, इस कार्यक्रम के लिए 25 लाख रुपये की व्यवस्था किए जाने से संबंधित साक्ष्य जांच में सामने आए हैं। एजेंसी ने कथित तौर पर विधायक देवेंद्र यादव और आरोपी सूर्यकांत तिवारी के बीच हुई WhatsApp बातचीत को इसका आधार बताया है।
WhatsApp चैट में 25 लाख की व्यवस्था का उल्लेख
EOW की ओर से अदालत में पेश किए गए चालान के मुताबिक, खैरागढ़ उपचुनाव के दौरान आयोजित ‘हमर भांचा राम’ कार्यक्रम के लिए 25 लाख रुपये की व्यवस्था से संबंधित बातचीत आरोपी सूर्यकांत तिवारी और विधायक देवेंद्र यादव के बीच हुई थी।
जांच एजेंसी ने इस बातचीत को अपने चालान में शामिल किया है। हालांकि, इस रकम का वास्तविक उपयोग और इससे जुड़े अन्य पहलुओं पर अंतिम निष्कर्ष अदालत में साक्ष्यों की जांच के बाद ही सामने आएगा।
खैरागढ़ उपचुनाव के दौरान हुआ था कार्यक्रम
‘हमर भांचा राम’ कार्यक्रम खैरागढ़ उपचुनाव के दौरान आयोजित किया गया था। उस समय कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आया था। भाजपा की ओर से निर्वाचन आयोग में शिकायत किए जाने की बात सामने आई थी।
भाजपा ने आरोप लगाया था कि रामनवमी पर शोभायात्रा निकालने की अनुमति नहीं दी जा रही थी, जबकि कांग्रेस की ओर से आयोजित कुमार विश्वास के कार्यक्रम को अनुमति दी गई। उस समय इसे लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी हुए थे।
12 आरोपियों से जुड़ा है पूरक चालान
EOW के इस पूरक चालान में कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल और आईएएस अधिकारी रानू साहू के भाई पीयूष साहू समेत 12 प्रमुख आरोपियों के खिलाफ जांच से जुड़े विवरण शामिल किए गए हैं।
चार्जशीट में आरोपियों के बीच कथित वित्तीय लेनदेन, रकम की व्यवस्था और उसके इस्तेमाल से जुड़े साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है।
चालान के बाद सियासी बयानबाजी तेज
विशेष अदालत में पूरक चालान पेश होने के बाद मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। वहीं कोर्ट परिसर में विधायक देवेंद्र यादव की ओर से दिए गए बयानों के बाद मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।
गौरतलब है कि चार्जशीट में दर्ज आरोप और जांच एजेंसी के दावे अभी न्यायालय में विचाराधीन हैं। इन आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत द्वारा साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर किया जाएगा।










