रायपुर। अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के पेंशनर्स के हितों को लेकर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखा है। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग द्वारा करीब 40 वर्षों से चली आ रही पेंशन व्यवस्था को बंद किए जाने पर चिंता जताते हुए संबंधित आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। साथ ही 70 से 90 वर्ष की आयु के पेंशनर्स के प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पेंशन और ग्रेच्युटी का भुगतान पूर्ववत जारी रखने का आग्रह किया है।
40 वर्षों से लागू है पेंशन व्यवस्था
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में सांसद अग्रवाल ने कहा कि अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए लंबे समय से पेंशन व्यवस्था लागू है। सेवानिवृत्ति के बाद बड़ी संख्या में पेंशनर्स अपनी आजीविका के लिए इसी पेंशन पर निर्भर हैं। ऐसे में वर्षों से चली आ रही व्यवस्था को बंद करने से बुजुर्ग पेंशनर्स के सामने आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयां खड़ी हो सकती हैं।
उच्च शिक्षा विभाग के आदेश को निरस्त करने की मांग
बृजमोहन अग्रवाल ने उच्च शिक्षा विभाग द्वारा पेंशन व्यवस्था के संबंध में जारी आदेश को निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि करीब चार दशक से चली आ रही व्यवस्था को अचानक समाप्त करने के बजाय पेंशनर्स की परिस्थितियों और उनके हितों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
70 से 90 वर्ष के पेंशनर्स को लेकर जताई चिंता
सांसद ने विशेष रूप से 70 से 90 वर्ष की आयु के पेंशनर्स का मुद्दा उठाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि उम्र के इस पड़ाव में बुजुर्ग पेंशनर्स की आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। नियमित पेंशन उनके लिए जीवनयापन का महत्वपूर्ण आधार है और इसे बंद किए जाने से उन्हें गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
पेंशन और ग्रेच्युटी का भुगतान जारी रखने का आग्रह
अग्रवाल ने मुख्यमंत्री साय से मांग की है कि अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के पात्र पेंशनर्स को पेंशन एवं ग्रेच्युटी का भुगतान पूर्ववत जारी रखा जाए। उन्होंने इस मामले में सरकार से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की उम्मीद जताई है।










