सरगुजा जिले के अंबिकापुर में एक विशेष पाक्सो कोर्ट (Fast Track Special Court) ने 11 वर्षीय बालिका के साथ लैंगिक उत्पीड़न के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायाधीश कमलेश जगदल्ला की अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए उसे मृत्यु पर्यंत आजीवन कारावास (मरते दम तक जेल) की सजा सुनाई है।
प्रमुख घटनाक्रम और अदालती फैसला
आरोपी, जो रिश्ते में पीड़िता का मामा लगता था और पड़ोसी भी था, ने अक्टूबर 2023 से जनवरी 2024 के बीच बालिका का उत्पीड़न किया। घटना का खुलासा तब हुआ जब पीड़िता के 8 वर्षीय भाई ने आरोपी की करतूत देख ली और अपनी माँ को बताया। 1 फरवरी 2024 को महिला थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई, जिसके बाद पुलिस ने तत्परता से आरोपी को गिरफ्तार किया। आरोपी को धारा 376 और POCSO एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया गया। मृत्यु पर्यंत कारावास के साथ-साथ कुल 60 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। पीड़िता को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता (क्षतिपूर्ति) देने का आदेश भी दिया गया है।
न्यायालय की तल्ख टिप्पणी
अदालत ने सजा सुनाते समय स्पष्ट किया कि दंड निर्धारित करते समय केवल अभियुक्त की पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि अपराध की प्रकृति और पीड़िता की मानसिक पीड़ा को देखा जाना अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा:
“आरोपी रिश्ते में मामा था, जिस पर सुरक्षा की जिम्मेदारी थी। ऐसे अपराध में नरमी दिखाने से समाज में गलत संदेश जाएगा।”










