सरायपाली: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर देश भर में स्वच्छता अभियान को एक जन-आंदोलन बनाया जा रहा है, लेकिन सरायपाली नगर पालिका क्षेत्र की स्थिति इसके बिल्कुल उलट है। शहर की लगभग 22 हजार की आबादी के लिए एकमात्र मनोरंजन का साधन ‘पुष्प वाटिका’ आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद यहाँ मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है।
लाखों का बजट, पर सुविधाएं जीरो
प्रतिदिन पुष्प वाटिका में सैंकड़ों की संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे सैर-सपाटों के लिए आते हैं। विडंबना देखिए कि लाखों रुपये के रखरखाव बजट के बाद भी यहाँ आने वाले लोगों को ये समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं। उद्यान के बाहर बने शौचालयों में पिछले 2 वर्षों से ताला लटका हुआ है।पुष्प वाटिका के अंदर जो शौचालय हैं, उनमें न तो पानी की सुविधा है और न ही दरवाजों पर कुंडी। कई शौचालयों के दरवाजे तो टूटे-फूटे पड़े हैं।इतनी बड़ी संख्या में आने वाले लोगों के लिए यहाँ पीने के साफ पानी तक की व्यवस्था नहीं है। चारों ओर साफ-सफाई का अभाव है, जिससे उद्यान की सुंदरता खत्म हो रही है।
महिला सुरक्षा और गरिमा पर सवाल
शौचालयों के दरवाजे टूटे होने और कुंडी न होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं और बच्चों को उठानी पड़ रही है। स्वच्छता मिशन के नाम पर फोटो खिंचवाने वाले जिम्मेदारों को शायद जनता की ये मूलभूत तकलीफें नजर नहीं आ रही हैं।
जनप्रतिनिधियों का रटा-रटाया जवाब
जब इस बदहाली के बारे में नगर पालिका के जनप्रतिनिधियों से बात की गई, तो उन्होंने हर बार की तरह “जल्द ही समाधान करने” का आश्वासन दिया है। सवाल यह उठता है कि अगर समाधान ‘जल्द’ होना था, तो 2 साल से शौचालय पर ताला क्यों लगा है?










